विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में दान और मोक्ष के संबंध का वर्णन गहन और बहुआयामी है।
दान स्वर्ग तक — गरुड़ पुराण के नवें अध्याय में कहा गया है — 'दान के प्रभाव से वह जीव देवताओं से पूजित होकर स्वर्ग को प्राप्त करता है।' स्वर्ग मोक्ष नहीं है — किंतु यह मोक्ष-मार्ग पर एक पड़ाव है।
दान + भक्ति = मोक्ष — गरुड़ पुराण में एकमात्र दान से मोक्ष नहीं मिलता — उसके साथ भक्ति और आत्म-ज्ञान आवश्यक हैं। 'ज्ञानी और सत्यव्रती व्यक्ति को बिना कर्मकाण्ड किए भी सद्गति प्राप्त करने की विधि बताई गई है' — यह गरुड़ पुराण का संकेत है।
वृषोत्सर्ग और मोक्ष — गरुड़ पुराण के बारहवें अध्याय में — 'अग्निहोत्रादि यज्ञों से और विविध दानों से भी वह गति नहीं होती जो वृषोत्सर्ग से प्राप्त होती है।' वृषोत्सर्ग एक दान है जो मोक्ष-निकटता देता है।
गोदान और मोक्ष — 'गोदान करने से पितर सीधे यमलोक से मुक्ति पाकर देवलोक की ओर प्रस्थान कर सकते हैं।' देवलोक से मोक्ष का मार्ग खुलता है।
गरुड़ पुराण का अंतिम संदेश — आत्म-ज्ञान और परमात्मा की शरण ही अंतिम मोक्ष का द्वार है।





