विस्तृत उत्तर
तलातल लोक की प्राप्ति उन कर्मों से होती है जिनमें तपस्या, दान और यज्ञ तो होते हैं, पर उनका उद्देश्य ईश्वर प्राप्ति या आत्म-कल्याण नहीं होता। यदि कर्म केवल भौतिक ऐश्वर्य, शारीरिक सुख, शक्ति और विलासिता की लालसा से प्रेरित हों, तो वे तलातल जैसे बिल-स्वर्ग की प्राप्ति करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त मायावी विद्याओं, तंत्र-मंत्र और जादू-टोने का दुरुपयोग करने वाले तथा आत्म-संरक्षण में अंधे होकर परमसत्य को नकारने वाले जीव भी मृत्यु के बाद तलातल को प्राप्त करते हैं।
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