लोकमहर्लोक स्वर्गलोक से कैसे अलग है?स्वर्गलोक भौतिक भोग का स्थान है जहाँ पुण्य क्षीण होने पर वापसी होती है। महर्लोक विशुद्ध तपस्या और सत्त्वगुण का लोक है जहाँ एक पूरा कल्प रहा जा सकता है।#महर्लोक#स्वर्गलोक#अंतर
दिव्यास्त्रअर्जुन को अंतर्धान अस्त्र कैसे मिला?वन पर्व में अर्जुन की तपस्या से प्रसन्न होकर स्वर्गलोक में कुबेर ने उन्हें चारों लोकपालों की दिव्य सभा में अपना परम प्रिय अंतर्धान अस्त्र प्रदान किया।#अर्जुन#अंतर्धान अस्त्र
प्रमुख मंदिरमाँ चंद्रघंटा की वर्तमान उपस्थिति के बारे में क्या मान्यता है?वर्तमान मान्यता: सूक्ष्म रूप में स्वर्गलोक में विराजमान + देवताओं की रक्षा। न्याय के लिए शरण आने वाले भक्त की अदृश्य रूप में रक्षा। ध्यान में घंटे की ध्वनि = देवी की उपस्थिति का प्रमाण।#वर्तमान उपस्थिति#स्वर्गलोक#न्याय शरण