ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

शरणागति — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 5 प्रश्न

🔍
गीता ज्ञान

गीता श्लोक 18.66 — सर्वधर्मान्परित्यज्य — अर्थ क्या?

गीता 18.66 (चरम श्लोक): 'सब छोड़कर मेरी शरण आ, मैं तुझे सभी पापों से मुक्त करूँगा, शोक मत कर।' रामानुज: गीता का सर्वोच्च श्लोक — प्रपत्ति (शरणागति) का परम उपदेश। गीता का सबसे आश्वस्त करने वाला वचन।

गीता 18.66शरणागतिचरम श्लोक
गीता ज्ञान

गीता का सबसे महत्वपूर्ण श्लोक कौन सा है?

सर्वाधिक प्रसिद्ध: 2.47 (कर्मण्येवाधिकारस्ते — कर्मयोग)। सर्वोच्च उपदेश: 18.66 (सर्वधर्मान् परित्यज्य — शरणागति, रामानुज का 'चरम श्लोक')। अन्य: 4.7 (अवतार), 2.48 (समत्वं योग), 4.36 (ज्ञानाग्नि)। उत्तर मार्ग पर निर्भर।

गीता श्लोकमहत्वपूर्णकर्मयोग
पौराणिक कथा

गजेंद्र मोक्ष की कथा का आध्यात्मिक संदेश

गजेंद्र (जीवात्मा) को मगरमच्छ (संसार बंधन) पकड़ता है। अपनी शक्ति, परिवार — सब असफल। अंत में पूर्ण शरणागति ('ॐ नमो भगवते') → विष्णु तुरंत आए, मुक्त किया। शिक्षा: अहंकार त्यागकर पूर्ण समर्पण ही एकमात्र मोक्ष मार्ग।

गजेंद्र मोक्षविष्णुशरणागति
मंदिर भक्ति

मंदिर में भगवान के दर्शन करते समय किस भाव से खड़े हों?

भाव (सभी शुद्ध): शरणागति (सर्वोत्तम — 'सब आपको समर्पित'), दास ('आप स्वामी'), सखा ('आप मित्र'), वात्सल्य ('आप मेरे बच्चे'), माधुर्य ('आप प्रियतम'), कृतज्ञता ('धन्यवाद'), विस्मय ('कितने अद्भुत!')। स्वाभाविक भाव = सही। सरलतम: 'हे भगवान, मैं यहाँ हूँ। आप मुझे देख रहे हैं।'

दर्शन भावभक्ति भावनवधा भक्ति
गीता दर्शन

गीता में मोक्ष का मार्ग क्या है?

गीता में मोक्ष के मुख्य मार्ग हैं — ज्ञानयोग (4/37), भक्तियोग (12/7) और शरणागति (18/66)। अंतिम संदेश में श्रीकृष्ण कहते हैं — केवल मेरी शरण आओ, मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त करूँगा।

मोक्षगीताभक्तियोग

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।