विस्तृत उत्तर
सुतल लोक भक्ति और शरणागति का प्रतीक इसलिए है क्योंकि इसका केंद्र महाराजा बलि का पूर्ण आत्म-समर्पण है। बलि ने भगवान वामन को तीन पग भूमि का दान दिया। जब भगवान ने दो पगों में संपूर्ण ब्रह्मांड नाप लिया और तीसरे पग के लिए स्थान नहीं रहा, तब बलि ने अपना सिर अर्पित किया ताकि उनका वचन झूठा न हो। भगवान वामन बलि के सर्वस्व त्याग, दृढ़ सत्यनिष्ठा और अनन्य भक्ति से प्रसन्न हुए। उन्होंने बलि को सुतल लोक दिया और स्वयं उनके रक्षक तथा नित्य द्वारपाल बने। इसलिए सुतल लोक भगवान विष्णु की अहैतुकी कृपा, भक्त की चरम शरणागति और धर्म की सर्वोच्चता का शाश्वत प्रमाण है।
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