विस्तृत उत्तर
राजा बलि को भगवान विष्णु का प्रिय भक्त इसलिए माना जाता है क्योंकि उन्होंने अपना सर्वस्व भगवान को समर्पित कर दिया। यद्यपि उनका जन्म दैत्य कुल में हुआ था, उनके भीतर अपने पितामह प्रह्लाद के समान परम वैष्णव गुण, क्षमा, दया, सत्यनिष्ठा और दानवीरता थी। जब भगवान वामन ने तीन पग भूमि मांगी, तब बलि ने अपने गुरु शुक्राचार्य के रोकने पर भी ब्राह्मण को दिया वचन नहीं तोड़ा। भगवान ने त्रिविक्रम रूप में दो पगों से संपूर्ण ब्रह्मांड नाप लिया और तीसरे पग के लिए स्थान न रहा, तब बलि ने अपना सिर अर्पित कर दिया। इस पूर्ण आत्म-समर्पण, जिसे सर्व-आत्म-निवेदन कहा गया है, से भगवान वामन अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने बलि को सुतल लोक दिया और स्वयं उनके रक्षक तथा द्वारपाल बन गए।
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