गीता ज्ञानगीता के 15वें अध्याय — पुरुषोत्तम योग क्या है?अध्याय 15 (पुरुषोत्तम योग — 20 श्लोक): संसार = उल्टा अश्वत्थ वृक्ष। जीवात्मा ईश्वर का अंश (15.7)। तीन पुरुष: क्षर (नाशवान), अक्षर (अविनाशी), पुरुषोत्तम (सर्वोच्च परमात्मा)। 'इसे जानने वाला सर्वज्ञ' (15.19-20)। गीता का सबसे गोपनीय अध्याय।#पुरुषोत्तम योग#गीता 15#अश्वत्थ वृक्ष
प्रलय और विष्णुविष्णु शेषनाग पर कैसे सो रहे थे?प्रलय-सागर में विष्णु हजार फनों वाले शेषनाग की छायायुक्त फण-शय्या पर अनिर्वचनीय योग में स्थित होकर शयन कर रहे थे।#विष्णु#शेषनाग
पंचांग एवं कैलेंडरअधिक मास में कौन से पुण्य कर्म करेंपुरुषोत्तम मास पुण्य = कई गुना। विष्णु भक्ति (गीता/सहस्रनाम), दान (अन्न/वस्त्र/गो), व्रत, तीर्थ स्नान, भागवत कथा, तुलसी पूजा। शुभ कार्य वर्जित, पर पुण्य = अनंत।#अधिक मास#पुण्य#कर्म