विस्तृत उत्तर
अधिक मास = पुरुषोत्तम (विष्णु) मास; शुभ कार्य वर्जित, परंतु पुण्य कर्म = अत्यंत विशेष फलदायी।
विशेष पुण्य कर्म
- 1विष्णु/कृष्ण भक्ति — भगवद्गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम, कृष्ण भजन।
- 2दान — अन्नदान, वस्त्रदान, गोदान = अनंत गुना फल।
- 3व्रत — उपवास, एकादशी विशेष, माह भर व्रत।
- 4तीर्थ यात्रा + स्नान — पवित्र नदी स्नान।
- 5जप — 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या गायत्री।
- 6कथा श्रवण — भागवत कथा, रामायण पाठ।
- 7तुलसी पूजा — विशेष पुण्यदायक (विष्णु प्रिया)।
पद्म पुराण: अधिक मास में किया पुण्य = सामान्य मास से कई गुना। यह 'पुरुषोत्तम' (विष्णु) का मास = विष्णु भक्ति = सर्वोत्तम।





