पंचांग एवं कैलेंडरअधिक मास में कौन से पुण्य कर्म करेंपुरुषोत्तम मास पुण्य = कई गुना। विष्णु भक्ति (गीता/सहस्रनाम), दान (अन्न/वस्त्र/गो), व्रत, तीर्थ स्नान, भागवत कथा, तुलसी पूजा। शुभ कार्य वर्जित, पर पुण्य = अनंत।#अधिक मास#पुण्य#कर्म
पंचांग एवं कैलेंडरअधिक मास में विवाह क्यों नहीं करतेअधिक मास = मलमास (अशुद्ध); कोई देवता अधिपति नहीं। विवाह/गृह प्रवेश/संस्कार वर्जित। पुण्य कर्म (दान/व्रत/भक्ति) = विशेष शुभ। ~32.5 माह में एक बार।#अधिक मास#विवाह#वर्जित
व्रत विधिपरमा एकादशी का व्रत किस उद्देश्य से रखें?परमा एकादशी: अधिक/पुरुषोत्तम मास शुक्ल एकादशी (2.5-3 वर्ष में एक बार)। उद्देश्य: सर्वपाप नाश, सभी एकादशियों का सम्मिलित पुण्य, मोक्ष कामना। अधिक मास = पुरुषोत्तम (विष्णु) मास — सर्व पुण्य कर्म अनेकगुना फल।#परमा एकादशी#अधिक मास#पुरुषोत्तम मास