सृष्टि-पालन-संहारशिव सृष्टि, पालन, संहार कैसे करते हैं?शिव को जल के मध्य स्थित, ब्रह्मा-विष्णु के मध्य प्रकाशमान, सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता, संहारकर्ता और मृत्युस्वरूप ईश्वर कहा गया है।#सृष्टि#पालन#संहार
विश्वव्यापक शिवशिव इन्द्रियों के विषयों में कैसे हैं?शिव को शब्द, स्पर्श, रस और गंध स्वरूप कहा गया है; उन्हें गंधी और गणों का अधिपति भी नमस्कार किया गया है।#शब्द#स्पर्श#रस
विश्वव्यापक शिवशिव पंचभूतों में कैसे हैं?शिव को जल, वायु, तेज, पृथ्वी और अंतरिक्ष में व्याप्त रूप से नमस्कार किया गया है।#पंचभूत#शिव#जल
लिंग रूपलिंग और लिंगी क्या हैं?विष्णु स्तुति में शिव को ऊर्ध्व लिंग, लिंगी, हेमलिंग, जललिंग और शिवलिंग रूप में नमस्कार किया गया है।#लिंग#लिंगी#ऊर्ध्व लिंग
प्रणव रूपअकार, उकार, मकार क्या हैं?अकार को परमात्मा, उकार को आदिदेव विद्यादेह और मकार को परमात्मा शिव कहा गया है।#अकार#उकार#मकार
प्रणव रूपप्रणवरूप रुद्र कौन हैं?प्रणवरूप रुद्र अद्वितीय और नाशरहित हैं; स्तुति में अकार, उकार और मकार रूप परमात्मा को भी नमस्कार किया गया है।#प्रणवरूप रुद्र#रुद्र#ओंकार
विष्णु स्तुतिविष्णु ने शिव की स्तुति कैसे की?विष्णु ने शिव को अनेक नामों और रूपों से नमस्कार किया, जैसे प्रणवरूप रुद्र, महादेव, ईशान, लिंग, लिंगी, ओंकार और सर्वज्ञ।#विष्णु#शिव स्तुति#महेश्वर
विष्णु स्तुतिविष्णु स्तुति क्या है?विष्णु स्तुति वह स्तोत्र है जिसमें विष्णु ने रुद्र, शिव, महेश्वर, ओंकार, मोक्षदाता और विश्वगर्भ रूपों को नमस्कार किया।#विष्णु स्तुति#महेश्वर#शिव
शिव स्तुतिविष्णु ने शिव की स्तुति क्यों की?विष्णु ने वेद-वाक्य से शिव को जानकर, उमा-महेश्वर और पाँच मंत्रों का दर्शन पाकर वरदाता ईशान परमेश्वर की स्तुति की।#विष्णु#शिव स्तुति#महादेव
पाँच शिव मंत्रपाँच शिव मंत्रों का क्या महत्व बताया गया है?इन पाँच मंत्रों को शिव के अंगों से जोड़ा गया है: ईशान मुकुट, तत्पुरुष मुख, अघोर हृदय, वामदेव गुह्यस्थान और सद्योजात चरण।#पाँच शिव मंत्र#ईशान#तत्पुरुष
पाँच शिव मंत्रवामदेव मंत्र क्या है?वामदेव मंत्र सामवेद से उत्पन्न, रक्तवर्ण, तेरह कलाओं से युक्त और छाछठ अक्षरों वाला बताया गया है।#वामदेव मंत्र#सामवेद#रक्तवर्ण
पाँच शिव मंत्रसद्योजात मंत्र क्या है?सद्योजात मंत्र यजुर्वेद से उत्पन्न, आठ कलाओं वाला, श्वेतवर्ण, शान्तिकारक और पैंतीस अक्षरों से युक्त बताया गया है।#सद्योजात मंत्र#यजुर्वेद#श्वेतवर्ण
पाँच शिव मंत्रअघोर मंत्र क्या है?अघोर मंत्र अथर्ववेद से उत्पन्न, आठ कलाओं से युक्त, तैंतीस अक्षरों वाला और कृष्णवर्ण बताया गया है।#अघोर मंत्र#अथर्ववेद#आठ कला
पाँच शिव मंत्रतत्पुरुष मंत्र क्या है?तत्पुरुष मंत्र गायत्री से उत्पन्न, चार कलाओं वाला, चौबीस अक्षरों से युक्त और हरित वर्ण का बताया गया है।#तत्पुरुष मंत्र#गायत्री#चार कला
पाँच शिव मंत्रईशान मंत्र क्या है?ईशान मंत्र ओंकार से उत्पन्न, पाँच कलाओं वाला, बुद्धिविवर्धक, धर्म-अर्थ सिद्ध करने वाला और शुद्ध स्फटिक जैसा शुभ्र बताया गया है।#ईशान मंत्र#ओंकार#पाँच कला
शब्दमय शिवअक्षरों से शिव का शरीर कैसे बताया गया है?अक्षरों से शिव के अंग बताए गए हैं: अकार मस्तक, आकार ललाट, इकार-ईकार नेत्र, मकार हृदय, हकार आत्मा और क्षकार क्रोध कहा गया है।#अक्षर शरीर#शिव#वर्णमाला
उमा-महेश्वरउमा-महेश्वर कैसे प्रकट हुए?ब्रह्मा-विष्णु की वैदिक स्तुति से प्रसन्न होकर महेश्वर लिंग में शब्दमय रूप से प्रकट हुए और उमा सहित दर्शन दिए।#उमा महेश्वर#महेश्वर#लिंग
शब्दमय शिवशब्दमय शिव रूप क्या है?वेदमंत्रों से स्तुति के बाद महेश्वर लिंग में दिव्य शब्दमय रूप धारण कर प्रकट हुए, जिनका शरीर अक्षरों से बताया गया।#शब्दमय शिव#महेश्वर#लिंग
सृष्टि क्रमआकाश और पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे बताई गई है?स्वर्ण अंड के ऊपरी पवित्र कपाल से आकाश और नीचे के भाग से पाँच लक्षणों वाली पृथ्वी की उत्पत्ति बताई गई है।#आकाश#पृथ्वी#स्वर्ण अंड
सृष्टि क्रमस्वर्ण अंड से सृष्टि कैसे हुई?लिंगरूप प्रणव से बीज योनि में स्थित होकर बढ़ा, स्वर्ण अंड बना और परमेश्वर ने उसे दो भागों में विभाजित किया।#स्वर्ण अंड#सृष्टि#प्रणव
त्रिदेव और ओम्ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संबंध ओम् से कैसे बताया गया है?ओम् से अकाररूप ब्रह्मा, उकाररूप विष्णु और मकाररूप नीललोहित शिव का प्रादुर्भाव बताया गया है।#ब्रह्मा#विष्णु#शिव
प्रणव ओम्प्रणव ओम् को ब्रह्म क्यों कहा गया है?प्रणव ओम् को रुद्र, परम कारण, सत्य-आनन्द, अमृतरूप परम ब्रह्म और सृष्टिकर्ता लिंगरूप प्रणव का वाचक बताया गया है।#प्रणव#ओम्#ब्रह्म
प्रणव ओम्अकार, उकार और मकार का क्या अर्थ है?अकार से ब्रह्मा, उकार से विष्णु और मकार से परमेश्वर नीललोहित शिव का प्रादुर्भाव बताया गया है।#अकार#उकार#मकार
प्रणव ओम्ओम् नाद कैसे प्रकट हुआ?ब्रह्मा और विष्णु के प्रणाम और विचार के बाद वहाँ स्पष्ट प्लुत स्वर से ओम्-ओम् नाद सुनाई पड़ा।#ओम्#नाद#प्रणव
लिंग तत्त्वशिवलिंग का आदि और अंत क्यों नहीं मिला?लिंग क्षय-वृद्धि से रहित, अव्यक्त और आदि-मध्य-अन्त से हीन था, इसलिए उसका मूल या अंत नहीं मिला।#आदि अंत#अनन्त लिंग#ज्योतिर्लिंग
लिंग अन्वेषणब्रह्मा ने हंस रूप क्यों लिया?ब्रह्मा ने अग्नि-स्तंभ रूप लिंग का ऊपरी अंत खोजने के लिए हंस रूप धारण किया।#ब्रह्मा#हंस रूप#लिंग अंत
लिंग अन्वेषणविष्णु ने वाराह रूप क्यों लिया?विष्णु ने अग्नि-स्तंभ रूप लिंग का मूल खोजने के लिए वाराह रूप धारण किया और नीचे की ओर गए।#विष्णु#वाराह रूप#लिंग मूल
लिंग अन्वेषणब्रह्मा और विष्णु शिवलिंग का अंत क्यों नहीं पा सके?वह लिंग आदि-मध्य-अन्त से हीन और अवर्णनीय था, इसलिए ब्रह्मा ऊपर जाकर भी अंत और विष्णु नीचे जाकर भी मूल नहीं पा सके।#ब्रह्मा#विष्णु#अनादि अनन्त
ज्योतिर्लिंगज्योतिर्मय अग्नि-स्तंभ क्या था?ज्योतिर्मय अग्नि-स्तंभ वही लिंग था जो ब्रह्मा-विष्णु के कलह को दूर करने और ज्ञान देने के लिए प्रकट हुआ।#ज्योतिर्मय अग्नि स्तंभ#लिंग#ब्रह्मा
प्रलय वर्णनप्रलय जल में विष्णु कैसे थे?प्रलय जल में विष्णु योगात्मा, विश्वात्मा, सर्वात्मा, नारायण और शेषनाग की शय्या पर शयन करते हुए बताए गए हैं।#विष्णु#प्रलय जल#नारायण
प्रलय वर्णनप्रलय के समय संसार कैसा था?प्रलय के समय अनावृष्टि से स्थावर पदार्थ सूख गए, प्राणी सूर्य की किरणों से दग्ध हुए और चारों ओर समुद्र ही समुद्र हो गया।#प्रलय#अनावृष्टि#सागर
ब्रह्मा-विष्णु विवादब्रह्मा और विष्णु में विवाद क्यों हुआ?विष्णु की माया से मोहित होकर ब्रह्मा और विष्णु दोनों ने स्वयं को सृष्टि, पालन और संहार का कर्ता कहा, इसलिए विवाद हुआ।#ब्रह्मा#विष्णु#विवाद
लिंग तत्त्वलिंगी किसे कहा गया है?परमेश्वर को लिंगी कहा गया है, जबकि प्रधान को लिंग कहा गया है।#लिंगी#परमेश्वर#लिंग
लिंग तत्त्वशिवलिंग क्या है?लिंग को प्रधान कहा गया है और आगे वही लिंगरूप प्रणव सभी लोकों की सृष्टि करने वाला बताया गया है।#शिवलिंग#लिंग#प्रधान
लिंगोद्भवशिवलिंग की उत्पत्ति कैसे हुई?ब्रह्मा और विष्णु के विवाद को दूर करने तथा ज्ञान देने के लिए समुद्र में ज्योतिर्मय, आदि-अन्तहीन लिंग प्रकट हुआ।#शिवलिंग#लिंगोद्भव#ब्रह्मा
अघोर मंत्रअघोर मंत्र का रोज जप क्यों करें?सभी पापों से मुक्ति के लिए ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य को अघोर मंत्र का नित्य जप करने के लिए कहा गया है।#अघोर मंत्र#नित्य जप#द्विज
पाप मुक्तिजन्म-जन्मांतर के पाप कैसे मिटते हैं?अघोर मंत्र से अभिमंत्रित पंचगव्य, हवन, शिवस्नान, उपवास, पंचगव्य पान और गायत्री जप की विधि से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति कही गई है।#जन्म जन्मांतर पाप#अघोर मंत्र#पंचगव्य
प्रायश्चित विधिउपवास के बाद क्या करना चाहिए?दिन-रात उपवास के बाद सुबह स्नान कर ब्रह्मकूर्च-विधि से बने पंचगव्य का पान, आचमन और शिव के आगे गायत्री जप करना चाहिए।#उपवास#पंचगव्य पान#आचमन
शिव स्नानशिव स्नान की विधि क्या है?अघोर मंत्र जपते हुए आठ द्रोण घी से देवेश शिव को स्नान कराकर बाद में शुद्ध जल से स्नान कराने का विधान है।#शिव स्नान#घी स्नान#अघोर मंत्र
हवन विधिअघोर मंत्र से हवन कैसे करें?अघोर मंत्र जपकर घी, चरु, समिध, तिल, यव और धान्य से अलग-अलग सात-सात आहुति देने का विधान है।#अघोर मंत्र#हवन#घी
पंचगव्य विधिपंचगव्य विधि क्या है?पंचगव्य विधि में कपिला गाय का मूत्र, गोबर, घी, दूध, दही और कुशजल लेकर अघोर मंत्र से अभिमंत्रित करने का विधान है।#पंचगव्य#कपिला गाय#अघोर मंत्र
जप विधानमानस, उपांशु और वाचिक जप कितना बताया गया है?संसर्गजन्य पाप के लिए एक लाख मानस जप, उसका चार गुना उपांशु जप और आठ गुना वाचिक जप बताया गया है।#मानस जप#उपांशु जप#वाचिक जप
संसर्ग दोषपापी के संपर्क का दोष कैसे मिटता है?पापी के संपर्क से लगे दोष के लिए दस हजार जप बताया गया है; संसर्गजन्य पाप शमन के लिए मानस, उपांशु या वाचिक जप का विधान भी है।#संसर्ग दोष#पापी का संपर्क#अघोर मंत्र
पाप प्रायश्चितचोरी के पाप से मुक्ति कैसे मिलती है?ब्राह्मण का धन हरण करने वाले और स्वर्ण चोरी करने वाले के लिए दस लाख अघोर मंत्र जप से पापमुक्ति बताई गई है।#चोरी#स्वर्ण चोरी#ब्राह्मण धन
दैनिक आचारबिना स्नान-पूजा भोजन करने का उपाय क्या है?बिना स्नान, गायत्री-जप, अग्निहोत्र या देव-अतिथि भोजन कराए बिना भोजन करने वाले द्विज के लिए एक हजार जप बताया गया है।#बिना स्नान भोजन#गायत्री जप#अग्निहोत्र
महापातक प्रायश्चितसुरापान का प्रायश्चित क्या है?सुरापान करने वाले के लिए एक लाख अघोर मंत्र जप और वारुणी पीने वाले के लिए पचास हजार जप बताया गया है।#सुरापान#मद्यपान#अघोर मंत्र
पाप प्रायश्चितगोहत्या और स्त्रीहत्या का उपाय क्या है?गोहत्या, कृतघ्नता और स्त्रीहत्या जैसे पापों के लिए दस हजार अघोर मंत्र जप से पापमुक्ति बताई गई है।#गोहत्या#स्त्रीहत्या#कृतघ्न
पाप प्रायश्चितक्रोध में किए पाप कैसे मिटते हैं?क्रोधपूर्वक किए गए पापों के लिए अघोर मंत्र का आठ गुना जप बताया गया है।#क्रोध में पाप#अघोर मंत्र#आठ गुना जप
पाप प्रायश्चितजानबूझकर किए पाप कैसे मिटते हैं?जानबूझकर किए गए पापों के लिए अघोर मंत्र का चार गुना जप बताया गया है।#जानबूझकर पाप#बुद्धिपूर्वक पाप#अघोर मंत्र
मानसिक-वाचिक पापमन के पाप कैसे मिटते हैं?मानसिक पापों के लिए वाचिक पाप की जप-संख्या से भी आधा अघोर मंत्र जप बताया गया है।#मानसिक पाप#मन के पाप#अघोर मंत्र