मानसिक-वाचिक पापवाणी के पाप कैसे मिटते हैं?वाचिक पापों के लिए अघोर मंत्र का पचास हजार जप बताया गया है, क्योंकि ब्रह्महत्या के एक लाख जप का आधा वाचिक पाप के लिए कहा गया है।#वाचिक पाप#वाणी के पाप#अघोर मंत्र
महापातक प्रायश्चितब्रह्महत्या का प्रायश्चित क्या है?ब्रह्महत्या के लिए एक लाख अघोर मंत्र जप से मुक्ति कही गई है; दूसरे स्थान पर ऐसे नराधम के लिए दस लाख मानस जप भी बताया गया है।#ब्रह्महत्या#प्रायश्चित#अघोर मंत्र
महापातक प्रायश्चितमहापातक से मुक्ति कैसे बताई गई है?महापातक से मुक्ति के लिए अघोर मंत्र जप, पंचगव्य-विधि, हवन, शिवस्नान, उपवास और गायत्री जप का विधान बताया गया है।#महापातक#ब्रह्महत्या#सुरापान
अघोर मंत्रअघोर मंत्र से कौन से पाप मिटते हैं?अघोर मंत्र से महापातक, उपपातक, मानसिक, वाचिक, कायिक, मिश्रित, प्रासंगिक और जानबूझकर किए गए पापों का नाश बताया गया है।#अघोर मंत्र#पाप मुक्ति#महापातक
अघोर मंत्रअघोर मंत्र क्यों जपा जाता है?अघोर मंत्र सभी प्रकार के पातक, उपपातक, मानसिक, वाचिक, कायिक और अनेक पापों की शुद्धि के लिए जपा जाता है।#अघोर मंत्र#अघोरेश्वर#शिव
अघोर फलअघोर शिव का ध्यान करने से क्या फल मिलता है?योग के द्वारा महादेव का ध्यान करने वाले मनीषी अविनाशी भगवान् रुद्र के दिव्य लोक को प्राप्त होते हैं।#अघोर ध्यान#महादेव#योग
शिवस्थानशिव का निर्विकार और निर्गुण स्थान क्या बताया गया है?शिव का स्थान महेश्वर का निर्विकार, निर्गुण, विश्वरूप और ऐश्वर्यमय स्थान बताया गया है।#निर्विकार#निर्गुण#विश्वरूप
महायोगमहायोग का उपदेश किसे दिया गया?अघोर परमेश्वर की उपासना करने के बाद चार कुमारों ने अपने शिष्यों को महायोग का उपदेश दिया।#महायोग#उपदेश#शिष्य
अघोर कुमारचार कृष्णवर्ण कुमारों का स्वरूप कैसा था?वे कृष्णवर्ण, कृष्णमाला से विभूषित और कृष्ण अंगराग से अनुलिप्त महात्मा कुमार बताए गए हैं।#कृष्णवर्ण कुमार#कृष्णमाला#कृष्ण अंगराग
अघोर कुमारअघोर शिव के पास प्रकट चार कुमार कौन थे?अघोर शिव के समीप कृष्ण, कृष्णशिख, कृष्णास्य और कृष्णवस्त्रधृक् नाम वाले चार महात्मा कुमार प्रकट हुए।#चार कुमार#कृष्ण#कृष्णशिख
अघोर दर्शनअघोर शिव ने ब्रह्मा को दर्शन कैसे दिया?ब्रह्मा ने ध्यान और शरणागति से अघोर को ब्रह्मस्वरूप मानकर ध्यान किया, तब अघोर महादेव ने उन्हें साक्षात् दर्शन दिया।#अघोर दर्शन#ब्रह्मा#ध्यान
अघोर उपासनाप्राणायाम और ध्यान से शिव की उपासना कैसे बताई गई है?ध्यानयुक्त मन, प्राणायाम और हृदय में महेश्वर को धारण करके अघोररूप परमेश्वर की शरण लेना उपासना रूप में बताया गया है।#प्राणायाम#ध्यान#उपासना
ब्रह्मा और अघोरब्रह्मा ने अघोर शिव की शरण कैसे ली?ब्रह्मा ने अघोर शिव को महादेव जानकर प्रणाम किया, प्राणायाम और ध्यान से महेश्वर को हृदय में धारण किया और उनकी शरण ली।#ब्रह्मा#अघोर#शरणागति
ब्रह्मा और अघोरब्रह्मा का वर्ण काला कैसे हुआ?प्रजासृष्टि की इच्छा से चिंतनमग्न और पुत्रकामना से ध्यानरत होने पर ब्रह्मा का वर्ण काला बताया गया है।#ब्रह्मा#कृष्णवर्ण#ध्यान
ब्रह्मा और अघोरब्रह्मा ने प्रजा-सृष्टि के लिए क्या किया?ब्रह्मा प्रजासृष्टि की इच्छा से दुःखित होकर विचारमग्न हुए और पुत्र की कामना से ध्यान करने लगे।#ब्रह्मा#प्रजासृष्टि#चिंतन
असित कल्पसृष्टि से पहले क्या स्थिति बताई गई है?प्रजासृष्टि से पहले एक हजार दिव्य वर्षों तक सर्वत्र जल ही जल व्याप्त बताया गया है।#सृष्टि#जल#प्रजासृष्टि
असित कल्पअसित कल्प क्या है?असित कल्प पीतकल्प के बीत जाने के बाद प्रवृत्त ब्रह्मा का दूसरा कल्प बताया गया है।#असित कल्प#कल्प#ब्रह्मा
अघोर रूपअघोर शिव का रूप कैसा बताया गया है?अघोर शिव का रूप कृष्णवर्ण, तेजस्वी, कृष्ण वस्त्र-पगड़ी, कृष्ण मुकुट, यज्ञोपवीत और कृष्ण अंगराग से युक्त बताया गया है।#अघोर रूप#कृष्णवर्ण#कृष्ण वस्त्र
अघोर महिमाअघोर शिव कौन हैं?अघोर शिव असित कल्प में कृष्णवर्ण कुमार के रूप में प्रकट हुए महादेव हैं, जिन्हें ब्रह्मा ने देवदेवेश और ब्रह्मस्वरूप माना।#अघोर#शिव#महादेव
तत्पुरुष फलपुनर्जन्म के बंधन से कैसे छूटा जा सकता है?नियतात्मा, ध्यानपरायण और जितेन्द्रिय होकर महेश्वर की शरण लेने से साधक पुनर्भव के बंधन से छूटता है।#पुनर्जन्म#पुनर्भव#मुक्ति
तत्पुरुष फलमहादेव में प्रविष्ट होने का क्या अर्थ बताया गया है?महादेव में प्रविष्ट होना पापमुक्त, शुद्धात्मा और ब्रह्मतेजसम्पन्न होकर पुनर्भव के बंधन से छूटने से जुड़ा है।#महादेव में प्रविष्ट#पुनर्भव मुक्ति#शिवप्राप्ति
तत्पुरुष फलध्यान और इन्द्रिय संयम से पाप कैसे दूर होते हैं?नियतात्मा, ध्यानपरायण और जितेन्द्रिय होकर महेश्वर की शरण लेने से सभी पाप दूर होते हैं।#ध्यान#इन्द्रिय संयम#जितेन्द्रिय
तत्पुरुष फलमहेश्वर की शरण लेने से क्या फल मिलता है?नियतात्मा, ध्यानपरायण और जितेन्द्रिय होकर महेश्वर की शरण लेने वाले पापों से मुक्त होकर महादेव में प्रविष्ट होते हैं।#महेश्वर शरण#पाप मुक्ति#शुद्धात्मा
महादेव का वरमहादेव ने ब्रह्मा को कौन-कौन से वर दिए?महादेव ने ब्रह्मा को दिव्य योग, महान् कीर्ति, ऐश्वर्य, ज्ञानसम्पदा और वैराग्य प्रदान किया।#महादेव#ब्रह्मा#दिव्य योग
रौद्री गायत्रीरौद्री गायत्री को ज्ञानदायिनी और विद्यास्वरूपिणी क्यों कहा गया है?रौद्री गायत्री को वेदप्रतिपादित, ज्ञानदायिनी, विद्यास्वरूपिणी और लोकवन्द्या महादेवी कहा गया है।#रौद्री गायत्री#ज्ञानदायिनी#विद्यास्वरूपिणी
रौद्री गायत्रीरौद्री गायत्री क्या है?रौद्री गायत्री वेदप्रतिपादित, ज्ञानदायिनी, विद्यास्वरूपिणी और लोकवन्द्या महादेवी धेनु के रूप में बताई गई है।#रौद्री गायत्री#धेनु#ज्ञानदायिनी
महेश्वरी धेनुमहेश्वर ने धेनु को ब्राह्मणों के कल्याण के लिए क्या बनाया?महेश्वर ने धेनु को रुद्राणी और ब्राह्मणों के कल्याण के लिये परमार्थसाधिका बनाया।#धेनु#ब्राह्मण कल्याण#परमार्थसाधिका
महेश्वरी धेनुरुद्राणी किसे कहा गया है?महादेव ने महेश्वरी धेनु से कहा कि तुम रुद्राणी होगी और ब्राह्मणों के कल्याण के लिये परमार्थसाधिका बनोगी।#रुद्राणी#महेश्वरी धेनु#महादेव
महेश्वरी धेनुमति, बुद्धि और स्मृति का संबंध महेश्वरी गाय से कैसे बताया गया है?महादेव ने उस महेश्वरी धेनु की महिमा गाते हुए कहा कि तुम मति हो, बुद्धि हो और स्मृति हो।#मति#बुद्धि#स्मृति
महेश्वरी धेनुमहेश्वरी गाय का स्वरूप कैसा बताया गया है?महेश्वरी गाय चार पैरों, चार मुखों, चार हाथों, चार स्तनों, चार नेत्रों, चार सींगों, चार दाढ़ों और बत्तीस गुणों से युक्त बताई गई है।#महेश्वरी गाय#विश्वरूपा#चार पैर
महेश्वरी धेनुमहेश्वर के मुख से निकली गाय कौन थी?महेश्वर के मुख से निकली गाय विश्वरूपा, महेश्वरस्वरूपिणी, ईश्वररूपिणी धेनु थी, जिसे आगे रौद्री गायत्री रूप में बताया गया।#महेश्वरी गाय#धेनु#रौद्री गायत्री
पीतवासा कल्पपीतवासा कल्प में शिव का कौन सा रूप प्रकट हुआ?पीतवासा कल्प में शिव पीतवस्त्रधारी महातेजस्वी कुमार और तत्पुरुष महादेव रूप से प्रकट बताए गए हैं।#पीतवासा कल्प#तत्पुरुष#पीतवस्त्रधारी कुमार
पीतवासा कल्पपीतवासा कल्प क्या है?पीतवासा कल्प इकतीसवाँ कल्प बताया गया है, जिसमें ब्रह्मा ने पीला वस्त्र धारण किया था।#पीतवासा कल्प#कल्प#ब्रह्मा
तत्पुरुष रूपशिव का पीला रूप कैसा बताया गया है?शिव का पीला रूप पीतवस्त्र, पीत माला, पीत गन्ध, पीली पगड़ी और हेमवर्ण यज्ञोपवीत से सुशोभित बताया गया है।#पीला रूप#पीतवस्त्र#पीत माला
तत्पुरुष महिमातत्पुरुष शिव कौन हैं?तत्पुरुष शिव पीतवासा कल्प में पीतवस्त्रधारी परमेश्वर रूप से प्रकट हुए महादेव हैं।#तत्पुरुष#शिव#महादेव
वामदेव फलरुद्रलोक को वापस न आने वाला स्थान क्यों बताया गया है?रुद्रलोक ऐसा स्थान बताया गया है जहाँ से जीव का पुनः संसार में आगमन नहीं होता।#रुद्रलोक#पुनरागमन नहीं#वामदेव
वामदेव फलवामदेव शिव की भक्ति से पाप कैसे दूर होते हैं?परमेश्वरपरायण होकर समाधि से वामदेव का ध्यान करने वाले भक्त विमल आत्मा और ब्रह्मनिष्ठ होकर पाप से छूटते हैं।#वामदेव भक्ति#पाप मुक्ति#समाधि
वामदेव फलवामदेव शिव का ध्यान करने से क्या फल मिलता है?वामदेव शिव का समाधि से ध्यान करने वाले भक्त पाप से छूटकर रुद्रलोक प्राप्त करते हैं।#वामदेव ध्यान#शिव भक्ति#पाप मुक्ति
वामदेव कुमारवामदेव के चार कुमार अंत में किसमें लीन हुए?चारों कुमार सम्पूर्ण धर्म का उपदेश करके अंत में शाश्वत महादेव रुद्र में समाविष्ट हो गए।#चार कुमार#वामदेव#महादेव रुद्र
वामदेव कुमारवामदेव से उत्पन्न चार कुमार कैसे थे?वे विशुद्ध आत्मा, ब्रह्मतेज से सम्पन्न, ब्रह्मनिष्ठ, ब्रह्मातुल्य, वीर, अध्यवसायी और रक्तवर्ण वस्त्र-माला से विभूषित थे।#चार कुमार#विरजा#विबाहु
वामदेव कुमारविरजा, विबाहु, विशोक और विश्वभावन कौन थे?विरजा, विबाहु, विशोक और विश्वभावन ब्रह्मा के चार कुमार थे, जो विशुद्ध आत्मा और ब्रह्मतेज से सम्पन्न बताए गए हैं।#विरजा#विबाहु#विशोक
ब्रह्मा और वामदेवब्रह्मा को कल्प-कल्प में परमेश्वर को जानने का वर कैसे मिला?ब्रह्मा ने ध्यान और परम भक्ति से वामदेव शिव का स्तवन किया, इसलिए उन्हें कल्प-कल्प में परमेश्वर को जानने का वर मिला।#ब्रह्मा#कल्प-कल्प#परमेश्वर
ब्रह्मा और वामदेववामदेव शिव ने ब्रह्मा को क्या वर दिया?वामदेव शिव ने ब्रह्मा से कहा कि वे ध्यानबल से कल्प-कल्प में उन्हें सर्वश्रेष्ठ और लोकाधार परमेश्वर रूप में जानेंगे।#वामदेव#ब्रह्मा#वर
वामदेव स्तुतिवामदेवाय मंत्र का क्या महत्व बताया गया है?वामदेवाय मन्त्र को ब्रह्म कहा गया है और ब्रह्मा ने उसे पूर्व में लगाकर परम भक्ति से शिव की स्तुति की।#वामदेवाय मंत्र#वामदेव#शिव स्तुति
वामदेव स्तुतिवामदेव शिव की स्तुति कैसे की गई?ब्रह्मा ने परम भक्ति से ब्रह्म अर्थात् वामदेवाय मन्त्र को पूर्व में लगाकर अनेक स्तुतियों से वामदेव शिव का स्तवन किया।#वामदेव स्तुति#ब्रह्मा#वामदेवाय मंत्र
ब्रह्मा और वामदेवब्रह्मा को ध्यान में लाल कुमार के रूप में कौन दिखाई दिए?ब्रह्मा को ध्यान में लाल कुमार के रूप में वामदेव शिव दिखाई दिए, जिन्हें उन्होंने साक्षात् देवेश्वर जाना।#ब्रह्मा#ध्यान#लाल कुमार
वामदेव रूपरक्तकल्प क्या है और इसमें शिव का कौन सा रूप प्रकट हुआ?रक्तकल्प तीसवाँ कल्प बताया गया है, जिसमें शिव वामदेव रूप से रक्तवर्ण कुमार के रूप में प्रकट हुए।#रक्तकल्प#वामदेव#शिव रूप
वामदेव रूपवामदेव शिव का लाल रूप कैसा बताया गया है?वामदेव शिव लाल कुमार के रूप में बताए गए हैं, जिनके भूषण, माला, वस्त्र और नेत्र रक्तवर्ण के थे।#वामदेव#लाल रूप#रक्तवर्ण
वामदेव महिमावामदेव शिव कौन हैं?वामदेव शिव रक्तकल्प में लाल कुमार के रूप में प्रकट हुए परमेश्वर हैं, जिन्हें ब्रह्मा ने साक्षात् देवेश्वर और ब्रह्मस्वरूप जाना।#वामदेव#शिव#महादेव
सद्योजात फलरुद्रलोक कैसे प्राप्त होता है?प्राणायामपरायण होकर ब्रह्मतत्परचित्त से विश्वेश्वरदेव की शरण लेने वाले विष्णुलोक को भी पार कर रुद्रलोक जाते हैं।#रुद्रलोक#विष्णुलोक#प्राणायाम