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श्रीलिङ्गमहापुराण से जुड़े सभी प्रश्न(578)

श्रीलिङ्गमहापुराण पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 578 प्रश्न उपलब्ध हैं।

सद्योजात फल

शिव की भक्ति और प्राणायाम से पाप कैसे दूर होते हैं?

प्राणायामपरायण और ब्रह्मतत्परचित्त होकर विश्वेश्वरदेव की शरण लेने से पापों से मुक्ति मिलती है।

#शिव भक्ति#प्राणायाम#पाप मुक्ति
सद्योजात फल

सद्योजात शिव की शरण लेने से क्या फल मिलता है?

प्राणायामपरायण होकर ब्रह्मतत्परचित्त से सद्योजात की शरण लेने वाले पापों से मुक्त, विमल आत्मा और ब्रह्मज्ञानी हो जाते हैं।

#सद्योजात#शरणागति#पाप मुक्ति
सद्योजात शिष्य

श्वेत मुनि को हर क्यों कहा गया?

श्वेत मुनि सद्योजात से उत्पन्न हुए, इसलिए उनका नाम हर भी बताया गया।

#श्वेत मुनि#हर#सद्योजात
सद्योजात शिष्य

श्वेत मुनि कौन थे?

श्वेत मुनि श्वेत आभा वाले महातेजस्वी मुनि थे, जो सद्योजात से उत्पन्न हुए।

#श्वेत मुनि#हर#सद्योजात
सद्योजात शिष्य

सुनन्द, नन्दन, विश्वनन्द और उपनन्दन कौन हैं?

ये सद्योजात ब्रह्म के समीप प्रकट हुए चार श्वेतवर्ण, महायशस्वी और सेवापरायण शिष्य थे।

#सुनन्द#नन्दन#विश्वनन्द
सद्योजात शिष्य

सद्योजात शिव के चार शिष्य कौन थे?

सद्योजात शिव के समीप सुनन्द, नन्दन, विश्वनन्द और उपनन्दन नामक चार श्वेतवर्ण शिष्य प्रकट हुए।

#सद्योजात#चार शिष्य#सुनन्द
ब्रह्मा और सद्योजात

ब्रह्मा ने सद्योजात शिव को परमेश्वर कैसे माना?

ब्रह्मा ने ध्यानयोग से सद्योजात कुमार को साक्षात् परमेश्वर जाना, प्रणाम किया और परात्पर ब्रह्म माना।

#ब्रह्मा#सद्योजात#परमेश्वर
सद्योजात महिमा

शिव का श्वेतलोहित रूप क्या है?

शिव का श्वेतलोहित रूप शिखाधारी श्वेतलोहित कुमार के रूप में प्रकट हुआ, जिसे ब्रह्मा ने परमेश्वर जाना।

#श्वेतलोहित#सद्योजात#कुमार
ब्रह्मा और सद्योजात

ब्रह्मा ने शिव को कुमार रूप में कैसे देखा?

ब्रह्मा समाधिस्थ होकर परमेश्वर का ध्यान कर रहे थे, तभी उन्होंने शिखाधारी श्वेतलोहित कुमार को देखा।

#ब्रह्मा#कुमार रूप#सद्योजात
सद्योजात महिमा

सद्योजात रूप में शिव कैसे प्रकट हुए?

जब ब्रह्मा समाधि में परमेश्वर का ध्यान कर रहे थे, तब शिखाधारी श्वेतलोहित कुमार प्रकट हुआ, जिसे सद्योजात माना गया।

#सद्योजात#शिव प्रकट#श्वेतलोहित कुमार
सद्योजात महिमा

सद्योजात शिव कौन हैं?

सद्योजात शिव को ब्रह्मा ने श्वेतलोहित कुमार रूप में देखा और साक्षात् परमेश्वर तथा परात्पर ब्रह्म जाना।

#सद्योजात#शिव#महेश्वर
श्रद्धा और शिवदर्शन

शिव का साक्षात दर्शन किससे मिलता है?

शिव का साक्षात दर्शन श्रद्धा से मिलता है; शिव ने कहा कि श्रद्धा से भक्त उन्हें वश में कर दर्शन पा सकता है।

#शिव साक्षात दर्शन#श्रद्धा#भक्ति
श्रद्धा और शिवदर्शन

श्रद्धा से ज्ञान, हवन, तप, स्वर्ग और मोक्ष का फल कैसे मिलता है?

शिव ने श्रद्धा को ज्ञान, हवन, तप, स्वर्ग और मोक्ष का फल प्रदान करने वाली बताया है।

#श्रद्धा#ज्ञान फल#हवन फल
श्रद्धा और शिवदर्शन

श्रद्धा को परम सूक्ष्म धर्म क्यों कहा गया है?

श्रद्धा ज्ञान, हवन, तप, स्वर्ग और मोक्ष का फल देती है, इसलिए उसे परम सूक्ष्म धर्म कहा गया है।

#श्रद्धा#परम सूक्ष्म धर्म#ज्ञान
श्रद्धा और शिवदर्शन

लिंग में श्रद्धापूर्वक शिव पूजा क्यों करनी चाहिए?

शिव ने द्विजों को लिंग में श्रद्धापूर्वक सदा पूजा करने का निर्देश दिया और श्रद्धा को दर्शन-फल देने वाली बताया।

#लिंग पूजा#श्रद्धा#शिव पूजा
श्रद्धा और शिवदर्शन

श्रद्धा से शिव को कैसे वश में किया जा सकता है?

शिव ने कहा कि मात्र श्रद्धा से भक्त उन्हें वश में कर सकता है और उनका दर्शन पा सकता है।

#श्रद्धा#शिव वश#भक्त
श्रद्धा और शिवदर्शन

ब्रह्मा को शिव ने भक्तिभाव कैसे दिया?

ब्रह्मा ने हृदय में शिव को देखा और अचल भक्ति माँगी; शिव ने उन्हें वह भक्तिभाव प्रदान किया।

#ब्रह्मा#भक्तिभाव#अचल भक्ति
श्रद्धा और शिवदर्शन

सद्योजात आदि पांच मन्त्रों का क्या संबंध है?

सद्योजात आदि पाँच मन्त्र शिव के पंचमुख रूप की पूजा से जुड़े बताए गए हैं।

#सद्योजात#पाँच मन्त्र#पंचमुख शिव
श्रद्धा और शिवदर्शन

पंचमुख शिव की पूजा कैसे करनी चाहिए?

द्विजों को पवित्र सद्योजात आदि पाँच मन्त्रों से शिव के पंचमुख रूप की पूजा करनी चाहिए।

#पंचमुख शिव#सद्योजात#पाँच मन्त्र
श्रद्धा और शिवदर्शन

शिवलिंग में ध्यान क्यों बताया गया है?

क्योंकि शिव ने स्वयं कहा कि ब्रह्मा और विष्णु द्वारा देखे गए लिंग में ही सबको उनका ध्यान करना चाहिए।

#शिवलिंग#ध्यान#श्रद्धा
श्रद्धा और शिवदर्शन

शिव का ध्यान कहाँ करना चाहिए?

शिव ने कहा कि ब्रह्मा और विष्णु ने समुद्र में जिस लिंग का दर्शन किया था, उसी में उनका ध्यान करना चाहिए।

#शिव ध्यान#लिंग#श्रद्धा
ब्रह्मा और शिव संवाद

ब्रह्मा ने शिव का दर्शन कैसे किया?

ब्रह्मा ने गायत्री-उपासना से शिव का दर्शन किया और उसी भक्ति से दर्शन प्राप्त होना बताया गया।

#ब्रह्मा#शिव दर्शन#गायत्री उपासना
शिवरूप

सद्योजात, वामदेव, तत्पुरुष, अघोर और ईशान कौन से शिवरूप हैं?

श्वेतकल्प में सद्योजात, रक्तकल्प में वामदेव, पीतकल्प में तत्पुरुष, कृष्णकल्प में अघोर और विश्वरूपकल्प में ईशान रूप बताया गया है।

#सद्योजात#वामदेव#तत्पुरुष
ब्रह्मा और शिव संवाद

ब्रह्मा ने शिव से क्या पूछा था?

ब्रह्मा ने पूछा कि शिव किस प्रकार वश में होते हैं और उनका ध्यान कहाँ करना चाहिए।

#ब्रह्मा#शिव#महादेव
वाराणसी और पार्वती प्रश्न

काशी को अविमुक्त क्षेत्र क्यों कहा गया है?

वाराणसीपुरी को अविमुक्त क्षेत्र कहा गया है, जहाँ शिव और रुद्राणी का संवाद बताया गया है।

#काशी#वाराणसी#अविमुक्त क्षेत्र
श्रद्धा और शिवदर्शन

शिव दर्शन किस साधन से मिलता है?

शिव दर्शन श्रद्धा से मिलता है; ब्रह्मा ने गायत्री-उपासना से शिव का दर्शन किया था।

#शिव दर्शन#श्रद्धा#भक्ति
श्रद्धा और शिवदर्शन

शिव को कौन सा साधन वश में करता है?

शिव ने कहा कि वे केवल श्रद्धा से वश में किये जा सकते हैं।

#शिव वश#श्रद्धा#भक्ति
वाराणसी और पार्वती प्रश्न

वाराणसी में पार्वती ने शिव से क्या पूछा?

पार्वती ने पूछा कि तप, विद्या, योग आदि किस साधन से शिव वश में होते, पूजित होते और दर्शन देते हैं।

#वाराणसी#पार्वती#शिव
शिवभक्ति

मुनियों का बल और सौभाग्य किससे बताया गया है?

मुनियों का बल और सौभाग्य शिवभक्ति के कारण बताया गया है।

#मुनि#बल#सौभाग्य
शिवभक्ति

ब्रह्मा, विष्णु और देवताओं को उत्तम पद कैसे मिला?

ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र और अन्य देवता शिवभक्ति से ही उत्तम पद को प्राप्त हुए।

#ब्रह्मा#विष्णु#इन्द्र
शिवभक्ति

शिवभक्त के दर्शन से क्या फल मिलता है?

शिवभक्तों के दर्शनमात्र से प्राणियों को स्वर्ग आदि लोक सहज सुलभ हो जाते हैं।

#शिवभक्त#दर्शन#स्वर्ग
शिवभक्ति

शिवभक्ति के बिना जीव बार-बार संसार में क्यों गिरता है?

शिवभक्ति से हीन प्राणी स्वर्गादि के लिए कर्मजाल में फँसकर मृत्युलोक में बार-बार गिरता है।

#शिवभक्ति#संसार#मृत्युलोक
शिवभक्ति

शिवभक्ति व्रत और उपवास से श्रेष्ठ क्यों बताई गई है?

हजारों चान्द्रायण, सैकड़ों प्राजापत्य व्रत, महीने भर उपवास और अन्य अनुष्ठानों से भी शिवभक्ति श्रेष्ठ कही गई है।

#शिवभक्ति#व्रत#उपवास
शिवभक्ति

शिवभक्ति पाने के साधन कौन-कौन से हैं?

ज्ञान, अध्यापन, होम, ध्यान, यज्ञ, तप, वेद, दान और अध्ययन शिवभक्ति प्राप्त करने के साधन बताए गए हैं।

#शिवभक्ति#ज्ञान#अध्यापन
शिवभक्ति

अपात्र व्यक्ति भी शिवभक्ति से कैसे योग्य बनता है?

पात्रता न होने पर भी परम शिवभक्ति अज्ञान का अंधकार दूर करती है और महेश्वर को प्रसन्न करती है।

#अपात्र#शिवभक्ति#अज्ञान अंधकार
शिवभक्ति

शिवभक्ति से मुक्ति कैसे मिलती है?

सर्वव्यापी परमेश्वर शिव में भक्ति रखने वाला प्राणी निःसंदेह मुक्ति प्राप्त करता है।

#शिवभक्ति#मुक्ति#परमेश्वर
ज्ञान और भक्ति

शिव किस ज्ञान और भक्ति से प्रसन्न होते हैं?

जड़ जगत से ईश्वर को पृथक जानने वाले ज्ञान और श्रद्धायुक्त भक्ति से शिव प्रसन्न होते हैं।

#शिव प्रसन्नता#ज्ञान#भक्ति
ज्ञान और भक्ति

वास्तविक ज्ञान क्या है?

प्रकृति से परमाणु तक जड़ जगत के सभी पदार्थों से ईश्वर को पृथक जानना वास्तविक ज्ञान है।

#वास्तविक ज्ञान#ईश्वर#प्रकृति
योग और वैराग्य

संन्यास का सही अर्थ क्या है?

विहित और निषिद्ध कर्मों में दोष-गुण बुद्धि का त्याग संन्यास है; इष्ट-अनिष्ट कर्मों को छोड़ना न्यास है।

#संन्यास#न्यास#विहित कर्म
योग और वैराग्य

विरक्त व्यक्ति कौन होता है?

जो प्रतिकूल विषयों से उद्विग्न और अनुकूल विषयों से हर्षित नहीं होता, वही विरक्त है।

#विरक्त#विराग#अनुकूल प्रतिकूल
योग और वैराग्य

शम का लक्षण क्या है?

जिसकी इन्द्रियाँ अपने या दूसरे के लिये मिथ्या प्रवृत्त नहीं होतीं, उसमें शम का लक्षण है।

#शम#इन्द्रिय संयम#मिथ्या प्रवृत्ति
योग और वैराग्य

संयमी व्यक्ति कैसा होता है?

जो विषयभोगों की नश्वरता सोचकर प्रलोभनों में भी अलुब्ध रहता है, वह संयमी है।

#संयमी#अलुब्ध#विषय नश्वरता
योग और वैराग्य

युक्त योगी कौन होता है?

सभी आसक्तियों से निवृत्त प्राणी युक्त-योगी कहलाता है।

#युक्त योगी#आसक्ति निवृत्ति#योग
योग और वैराग्य

शिवात्मा कौन कहलाता है?

मायायुक्त कर्मफल का त्याग करने वाला शिवात्मा कहलाता है।

#शिवात्मा#कर्मफल त्याग#माया
दान और साधुधर्म

साधुधर्म क्या है?

श्रुति-स्मृति से विहित, वर्णाश्रम से सम्बद्ध और शिष्टाचार के अनुकूल धर्म साधुधर्म है।

#साधुधर्म#श्रुति#स्मृति
दान और साधुधर्म

दान कितने प्रकार का बताया गया है?

दान तीन प्रकार का बताया गया है: कनिष्ठ, मध्यम और श्रेष्ठ।

#दान#कनिष्ठ दान#मध्यम दान
दान और साधुधर्म

दान का सही लक्षण क्या है?

न्यायपूर्वक अर्जित प्रिय द्रव्य को गुणी पात्र को देना दान का लक्षण है।

#दान#न्यायपूर्वक धन#गुणी पात्र
धर्म और आचार

दया किसे कहा गया है?

अपने हित-अहित की तरह सभी प्राणियों के हित-अहित का ध्यान रखने वाली निरंतर वृत्ति दया है।

#दया#सभी प्राणी#हिताहित
धर्म और आचार

तप क्या बताया गया है?

ब्रह्मचर्य, मौन, निराहार, अहिंसा और सर्वविध शान्ति तप बताए गए हैं।

#तप#ब्रह्मचर्य#मौन
धर्म और आचार

सत्य बोलने का सही अर्थ क्या है?

पूछे जाने पर देखे गए कथनयोग्य और अकथनीय विषय को बिना छिपाए व्यक्त करना सत्य कहा गया है।

#सत्य#वाणी#देखा हुआ
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