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विस्तृत उत्तर
वामदेव के चार कुमार अंत में शाश्वत महादेव रुद्र में लीन हो गए। पाठ में कहा गया है कि एक हजार वर्ष के बाद वे ब्रह्मभाव में लीन ब्रह्मप्रिय महात्मा कुमार वामदेवरूप ब्रह्म का चिन्तन करते रहे। लोक के अनुग्रह और शिष्यों के कल्याण की इच्छा से उन्होंने सम्पूर्ण धर्म का उपदेश किया। इसके बाद वे पुनः शाश्वत महादेव रुद्र में समाविष्ट हो गए।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 12, PDF पृष्ठ 65, श्लोक 11-13
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