विस्तृत उत्तर
सनकादिक मुनि ब्रह्मा जी के चार मानस पुत्र थे: सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार। वे सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा जी के मन से उत्पन्न हुए। ब्रह्मा ने उन्हें प्रजा-वृद्धि के लिए गृहस्थ जीवन अपनाने की आज्ञा दी, पर वे जन्म से ही विरक्त और ब्रह्मज्ञानी थे। उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य स्वीकार किया और संसार के बंधन में प्रवेश नहीं किया। वे सदैव बालक रूप में रहते हैं और ब्रह्मांड में विचरण करते हुए आत्मज्ञान, वैराग्य और भक्ति का मार्ग दिखाते हैं। हंस अवतार की कथा में इन्हीं मुनियों ने मन और विषयों के संबंध पर प्रश्न पूछा था।
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