विस्तृत उत्तर
रक्तकल्प तीसवाँ कल्प बताया गया है। उस कल्प में महान् तेजस्वी ब्रह्मा ने रक्तवर्ण धारण किया था। पुत्र की कामना से ध्यानरत ब्रह्मा के सामने इसी रक्तकल्प में एक महातेजस्वी, प्रतापी और रक्तवर्ण कुमार प्रकट हुआ। ब्रह्मा ने परम ध्यानयोग से उसे साक्षात् देवेश्वर जाना और वामदेव नामक परमेश्वर को ब्रह्मस्वरूप माना। इसलिए रक्तकल्प वामदेव शिव के लाल कुमाररूप प्रादुर्भाव से जुड़ा है।
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