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विस्तृत उत्तर
जनलोक ब्रह्मा के मानस पुत्रों और महान नैष्ठिक ब्रह्मचारियों का मूल और शाश्वत निवास स्थान है। ब्रह्मा जी के मानस पुत्र चार कुमार जन्म से ही पूर्ण ज्ञान, वैराग्य और परमहंस स्थिति में थे। उन्होंने भौतिक प्रपंच और सांसारिक जीवन से दूर रहकर अखंड नैष्ठिक ब्रह्मचर्य स्वीकार किया। जनलोक विशुद्ध ज्ञान, उच्च वैराग्य और ब्रह्म-चिंतन का लोक है, इसलिए ऐसे आत्मज्ञानी और वैराग्ययुक्त मानस पुत्रों का निवास जनलोक में बताया गया है।
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