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विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा रात में प्रलय करते हैं। दिन में जो वैकारिक सृष्टि, देवता, प्रजापति और महर्षि विद्यमान रहते हैं, वे रात में विलीन हो जाते हैं। ब्रह्मा का अहोरात्र उत्पत्ति और प्रलय से जुड़ा है। रात समाप्त होने पर वही सृष्टि फिर उत्पन्न हो जाती है। इस प्रकार सृष्टि का प्रवाह ब्रह्मा के दिन और रात के क्रम में बताया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 4, PDF पृष्ठ 24, श्लोक 2-4
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