विस्तृत उत्तर
एक पूर्ण कल्प के पश्चात् जब ब्रह्मा जी का एक दिन समाप्त होता है और उनकी विश्राम की रात्रि आरम्भ होती है तब नैमित्तिक प्रलय घटित होता है। विष्णु पुराण और भागवत पुराण के अनुसार इस नैमित्तिक प्रलय में केवल नीचे के तीन लोक (भूर्लोक, भुवर्लोक, और स्वर्लोक) ही पूरी तरह से भस्म और जलमग्न होते हैं। यद्यपि महर्लोक इस प्रलय की अग्नि से भस्म नहीं होता परन्तु सङ्कर्षण की इस अग्नि के भयंकर ताप और धुएँ के कारण यह लोक निवासियों के रहने योग्य नहीं रह जाता। इस असहनीय स्थिति में महर्लोक में निवास करने वाले भृगु आदि महर्षि इस लोक का परित्याग कर देते हैं और अपनी योग-शक्ति से जनलोक या सत्यलोक की ओर पलायन कर जाते हैं।
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