विस्तृत उत्तर
महातल लोक में मृत्यु का भय मुख्य रूप से भगवान के काल-रूप, उनके वाहन गरुड़ के आक्रमण और महाप्रलय के समय होता है। सामान्य रूप से महातल के निवासियों को बुढ़ापा, रोग, कमजोरी या साधारण मृत्यु का भय नहीं सताता। किंतु महातल में मृत्यु एक ही रूप में आती है, और वह है भगवान का काल-रूप या उनके वाहन गरुड़ का आक्रमण। जब ब्रह्मांड के महाप्रलय का समय आता है और पाताल के भी नीचे स्थित भगवान संकर्षण, अर्थात शेषनाग, के मुख से प्रलय की अग्नि उत्पन्न होती है, तभी इन निवासियों के मन में वास्तविक मृत्यु का भय उत्पन्न होता है।
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