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विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में मुख्य रूप से दो प्रकार के प्रलय का वर्णन आता है: नैमित्तिक प्रलय और प्राकृत प्रलय। नैमित्तिक प्रलय ब्रह्मा के दिन की समाप्ति और उनकी रात्रि के आरंभ के समय होता है। इस समय पाताल लोक के सबसे नीचे स्थित भगवान संकर्षण, यानी अनंत शेषनाग, के मुख से भयंकर संहारक अग्नि उत्पन्न होती है। यह अग्नि भूर्लोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक को भस्म करती है और उसका ताप महर्लोक तक पहुँचता है।
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