लोकविष्णु पुराण के छठे अंश में महर्लोक के संताप का वर्णन क्या है?विष्णु पुराण (६.३.२८-२९) में वर्णन है कि संकर्षण की अग्नि का भयंकर ताप महर्लोक को संतापित करता है जिससे भृगु आदि महर्षि इसे छोड़कर जनलोक की ओर पलायन करते हैं।#विष्णु पुराण 6.3#महर्लोक#संताप
लोकसंकर्षण की अग्नि का उद्गम कहाँ से होता है?संकर्षण की अग्नि (कालानल) का उद्गम पाताल के मूल में स्थित भगवान शेषनाग (संकर्षण/अनन्त देव) के मुख से होता है। यह पाताल से ऊपर उठकर त्रैलोक्य को भस्म करती है।#संकर्षण
लोकसंकर्षण की अग्नि से महर्लोक कैसे प्रभावित होता है?संकर्षण की अग्नि त्रैलोक्य को भस्म करती है और उसका भयंकर ताप महर्लोक तक पहुँचता है। महर्लोक भस्म नहीं होता पर असहनीय ताप से निर्जन हो जाता है।#संकर्षण#महर्लोक#ताप
लोकसंकर्षण की अग्नि क्या है?संकर्षण की अग्नि (कालानल) पाताल के मूल में स्थित भगवान शेषनाग के मुख से नैमित्तिक प्रलय में उत्पन्न होती है और पाताल से ऊपर उठकर त्रैलोक्य को भस्म करती है।#संकर्षण#कालानल#शेषनाग
लोकनैमित्तिक प्रलय में महर्लोक की क्या स्थिति होती है?नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक भस्म नहीं होता (अकृतक) पर संकर्षण की अग्नि के ताप से निर्जन हो जाता है (कृतक)। भृगु आदि ऋषि जनलोक चले जाते हैं। यही कृतकाकृतक प्रकृति है।#नैमित्तिक प्रलय#महर्लोक#कृतकाकृतक
लोकसंकर्षण की अग्नि क्या है?संकर्षण की अग्नि (कालानल) भगवान शेषनाग के मुख से नैमित्तिक प्रलय में उत्पन्न होती है। यह पाताल से ऊपर उठकर त्रैलोक्य को भस्म करती है और महर्लोक तक ताप पहुँचाती है।#संकर्षण#अग्नि#कालानल
लोकनैमित्तिक प्रलय में महर्लोक का क्या होता है?नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक भस्म नहीं होता लेकिन संकर्षण की अग्नि के असहनीय ताप से रहने योग्य नहीं रहता। भृगु आदि ऋषि जनलोक की ओर पलायन कर जाते हैं।#नैमित्तिक प्रलय#महर्लोक#ताप
लोकइलावृत वर्ष में भगवान शिव किसकी उपासना करते हैं और क्यों?इलावृत वर्ष में भगवान शिव चतुर्व्यूह के चतुर्थ अंश 'संकर्षण' की उपासना करते हैं। यह दर्शाता है कि शिव जी भी भगवान विष्णु के संहार-स्वरूप के उपासक हैं।#इलावृत वर्ष#भगवान शिव#संकर्षण
लोकमहातल लोक में मृत्यु का भय कब होता है?महातल में मृत्यु का भय गरुड़ के आक्रमण, भगवान के काल-रूप या महाप्रलय की अग्नि के समय होता है।#महातल मृत्यु#गरुड़#प्रलय
लोकनैमित्तिक प्रलय क्या होता है?नैमित्तिक प्रलय ब्रह्मा के दिन के अंत और रात्रि के आरंभ पर होने वाला प्रलय है।#नैमित्तिक प्रलय#प्रलय#ब्रह्मा
लोकसंकर्षण की अग्नि और सत्यलोक का क्या संबंध है?संकर्षण की अग्नि नैमित्तिक प्रलय में त्रैलोक्य को जलाती है और महर्लोक तक पहुँचती है — पर सत्यलोक इससे पूर्णतः सुरक्षित रहता है। योगी इस समय सत्यलोक में शरण लेते हैं।#संकर्षण#अग्नि#सत्यलोक