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दक्षिण दिशा से जुड़े सभी प्रश्न(23)

दक्षिण दिशा पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 23 प्रश्न उपलब्ध हैं।

दिव्यास्त्र

यमराज कौन हैं और उन्हें धर्मराज क्यों कहते हैं?

यमराज सूर्य देव के पुत्र और दक्षिण दिशा के दिक्पाल हैं। वे केवल प्राण नहीं हरते बल्कि जीवों के कर्मों का न्याय भी करते हैं, इसीलिए उन्हें धर्मराज कहते हैं।

#यमराज#धर्मराज#सूर्य देव
लोक

त्रयोदशी श्राद्ध में दक्षिण दिशा क्यों?

दक्षिण पितरों की दिशा है।

#दक्षिण दिशा#पितर#तर्पण
लोक

एकादशी श्राद्ध में दक्षिण दिशा क्यों?

दक्षिण दिशा पितरों की दिशा है।

#दक्षिण दिशा#पितर#श्राद्ध विधि
लोक

दशमी श्राद्ध में दक्षिण दिशा क्यों?

दक्षिण पितरों की दिशा है।

#दक्षिण दिशा#यमराज#पितर
लोक

नवमी श्राद्ध में मुख किस दिशा में रखें?

दक्षिण दिशा की ओर।

#दक्षिण दिशा#तर्पण#नवमी श्राद्ध
लोक

अष्टमी श्राद्ध में कौन सा मुख रखना चाहिए?

दक्षिण दिशा की ओर मुख रखें।

#दक्षिण दिशा#तर्पण#श्राद्ध विधि
श्राद्ध विधि

श्राद्ध करते समय किस दिशा में मुख रखें?

श्राद्ध करते समय कर्ता का मुख अनिवार्य रूप से दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। शास्त्रों में दक्षिण दिशा को यमलोक और पितृलोक की दिशा माना गया है। पितर भी दक्षिण दिशा से ही आते हैं। देव कार्य में पूर्व या उत्तर, और पितृ कार्य में दक्षिण दिशा होती है।

#दक्षिण दिशा#श्राद्ध दिशा#पितृ कार्य
पितृ पक्ष

पितर किस दिशा से घर आते हैं?

पितर 'दक्षिण दिशा' से अपने वंशजों के घर आते हैं। शास्त्रों में दक्षिण दिशा को यमलोक और पितृलोक की दिशा माना गया है। यही कारण है कि श्राद्ध करते समय भी दक्षिण की ओर मुख रखा जाता है। वायु पुराण का दर्शन।

#पितर दिशा#दक्षिण दिशा#यमलोक
लोक

पितृ तर्पण दक्षिण दिशा की ओर मुख करके क्यों किया जाता है?

पितरों और यमराज का संबंध दक्षिण दिशा से माना गया है, इसलिए पितृ तर्पण दक्षिणाभिमुख होता है।

#दक्षिण दिशा#पितृ तर्पण#यमराज
लोक

यमदूत आत्मा को दक्षिण दिशा में क्यों ले जाते हैं?

यमलोक ब्रह्मांड के दक्षिणी भाग में है, इसलिए यमदूत आत्मा को दक्षिण दिशा के यममार्ग से ले जाते हैं।

#यमदूत#दक्षिण दिशा#यममार्ग
पूजा विधान

माँ काली की साधना की पूर्ण विधि क्या है?

काली साधना विधि: एकांत + दक्षिण दिशा + काला आसन → संकल्प → गुरु-गणेश-भैरव पूजन → यंत्र स्थापना + पंचोपचार/षोडशोपचार → अंगन्यास-करन्यास → 11/21/108 माला मंत्र जाप → काली कवच पाठ → आरती + क्षमा प्रार्थना।

#काली साधना विधि#दक्षिण दिशा#काला आसन
साधना सामग्री

महाकाली यंत्र कैसे बनाते हैं और कहाँ स्थापित करते हैं?

महाकाली यंत्र: भोजपत्र पर नमक+काली सरसों+लौंग की स्याही से कनेर कलम द्वारा निर्माण। 'ओम कालिका नमः' जाप करते रहें। त्रिकोण-वृत्त-भूपुर। स्थापना: काले वस्त्र पर प्लेट में रोली/काजल से त्रिकोण → यंत्र स्थापित। दक्षिण दिशा में।

#महाकाली यंत्र#भोजपत्र#कनेर कलम
पूजा विधान

धूमावती साधना में दक्षिण दिशा और काले कपड़े का क्या महत्व है?

धूमावती साधना: दक्षिण दिशा में लकड़ी की चौकी पर काला कपड़ा → उस पर गीला नारियल या यंत्र। काले वस्त्र और काले आसन का ही प्रयोग। यह देवी के उग्र-तांत्रिक-श्मशानी स्वरूप के अनुकूल।

#दक्षिण दिशा#काला कपड़ा#काले वस्त्र
पूजा विधान

माँ धूमावती की साधना की पूर्ण विधि क्या है?

धूमावती साधना विधि: ब्रह्म मुहूर्त में स्नान → काले वस्त्र → गंगाजल से पूजा स्थल शुद्धि → दक्षिण दिशा में काले कपड़े पर गीला नारियल/यंत्र → तेल दीपक → संकल्प-विनियोग-न्यास → ध्यान-पूजन → 9 माला × 9/11/21 दिन → दशांश हवन (काली मिर्च+काले तिल+घी)।

#धूमावती साधना विधि#ब्रह्म मुहूर्त#दक्षिण दिशा
पूजा विधान

कर्ण मातंगी साधना की विधि क्या है?

कर्ण मातंगी साधना: दक्षिण दिशा, घी या तेल का दीपक। 11 दिन × 21 या 51 माला जाप। 11वें दिन तेल + राई मिलाकर उसी मंत्र से 1000 आहुतियाँ।

#कर्ण मातंगी विधि#दक्षिण दिशा#11 दिन
तिल का महत्व और षट्तिला

मकर संक्रांति पर तिल-तर्पण कैसे करते हैं?

तिल-तर्पण: स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को तिल मिश्रित जल (अंजलि) अर्पित करें। फल: पितरों को तृप्ति, वंश वृद्धि और जीवन की बाधाओं का निवारण।

#तिल तर्पण#दक्षिण दिशा#पितर तृप्ति
राजसिक साधना विधि

महाकाल भैरव साधना में कौन सी दिशा में बैठना चाहिए?

महाकाल भैरव साधना में दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।

#दक्षिण दिशा#पश्चिम दिशा#भैरव साधना दिशा
सावधानियाँ और नियम

साधना में उत्तर दिशा क्यों वर्जित है?

साधना में उत्तर दिशा वर्जित है क्योंकि बटुक भैरव की दिशा दक्षिण है — दक्षिण दिशा में मुख करके साधना करनी चाहिए।

#उत्तर दिशा वर्जित#दक्षिण दिशा#भैरव दिशा
साधना विधि और नियम

बटुक भैरव साधना किस दिशा में करनी चाहिए?

बटुक भैरव साधना दक्षिण दिशा में मुख करके करनी चाहिए — यह भैरव की दिशा है। उत्तर दिशा वर्जित है।

#दक्षिण दिशा#भैरव दिशा#जप दिशा
श्री रुद्र-कवच-संहिता

'अघोर' कवच भगवान शिव के किस मुख का प्रतीक है?

अघोर मुख शिव के दक्षिण मुख का प्रतीक है, जो नकारात्मक शक्तियों के विनाश के लिए जाना जाता है।

#अघोर मुख#संहार#दक्षिण दिशा
गृह आचार एवं पूजा विधि

दक्षिण दिशा में मुँह करके भोजन क्यों नहीं करना चाहिए?

दक्षिण यमराज की दिशा है — यहाँ मुँह करके भोजन करने से आयु, आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। पूर्व और उत्तर दिशा में भोजन करना सबसे शुभ है।

#भोजन दिशा#वास्तु#दक्षिण दिशा
वास्तु शास्त्र

दक्षिण दिशा में सिर करके सोना शुभ है या अशुभ

दक्षिण दिशा में सिर करके सोना अत्यंत शुभ है। अष्टांग हृदय और वास्तु शास्त्र दोनों इसे गहरी नींद, दीर्घायु और स्वास्थ्य के लिए सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। यम दिशा होने से अशुभ मानना भ्रम है — शास्त्रों में यह आयुवर्धक कहा गया है।

#शयन दिशा#दक्षिण दिशा#वास्तु
त्योहार पूजा

धनतेरस पर यम के लिए दीपक क्यों जलाते हैं?

धनतेरस यम दीपक: कथा — रानी ने दीपक-आभूषण से यमराज को रोका, पति प्राण बचे। विधि: दक्षिण दिशा, जमीन पर, तिल तेल, चार बत्ती, 'मृत्युना पाशहस्तेन...' मंत्र। उद्देश्य: अकाल मृत्यु रक्षा, दीर्घायु। रात भर जलता रहे।

#धनतेरस#यम दीपक#यमराज
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