विस्तृत उत्तर
संध्या काल (सूर्यास्त के समث दीपक जलाना अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे 'सायं संध्या दीप' या 'गोधूलि बेला का दीपक' कहते हैं।
कहाँ-कहाँ दीपक रखें
- 1पूजा घर/मंदिर — सबसे पहले पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाएँ और आरती करें।
- 1तुलसी के पास — तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना अत्यंत शुभ है (इसकी विशेष परंपरा है)।
- 1मुख्य द्वार/चौखट — घर के मुख्य दरवाज़े पर दीपक रखने से माँ लक्ष्मी का आगमन होता है और नकारात्मक शक्तियाँ प्रवेश नहीं करतीं।
- 1दक्षिण दिशा में — वास्तु के अनुसार पूजा के बाद दीपक को दक्षिण दिशा में रखना चाहिए — इससे यमराज से रक्षा और पितृ कृपा मिलती है।
- 1रसोई/किचन — रसोई में छोटा दीपक जलाना अन्नपूर्णा माता की कृपा के लिए शुभ है।
- 1पीपल/बरगद वृक्ष के नीचे — शनिवार को पीपल के नीचे दीपक जलाना शनि दोष शांति के लिए प्रभावी माना जाता है।
संध्या दीपक के नियम
- ▸दीपक जलाने से पहले घर की सफाई करें।
- ▸दीपक घी या सरसों तेल का हो।
- ▸दीपक बुझने न दें, यह अशुभ माना जाता है।
- ▸दीपक जलाते समय 'शुभं करोति कल्याणम्...' श्लोक का पाठ करें।





