काली पूजाकाली पूजा में रात को दीपदान का क्या महत्व है?अंधकार→प्रकाश = अज्ञान नाश। अमावस्या + दीपक = काली कृपा। 'तमसो मा ज्योतिर्गमय।' काली = बाहर अंधकार, भीतर ज्योति। 14 दीपक, सरसों तेल/घी, चारों कोनों + द्वार।#दीपदान#रात#काली
मरणोपरांत आत्मा यात्राप्रेत को दीपदान क्यों दिया जाता है?दीपदान ग्यारहवें और बारहवें दिन प्रेत की तृप्ति के लिए दिए जाने वाले अन्न-जल के साथ किया जाता है।#दीपदान#प्रेत#ग्यारहवाँ दिन
साधना के चरणअसितांग भैरव पूजा में दीपक कैसा जलाएं?असितांग भैरव पूजा में शुद्ध घी का दीपक (पीतल/दीया) जलाएं — यह अज्ञान (रोग का मूल कारण) के अंधकार का नाश करता है।#घी दीपक#अज्ञान नाश#पीतल दीया
पूजा विधि और सामग्रीबटुक भैरव पूजा में दीपक कैसा जलाएं?बटुक भैरव पूजा में केवल तेल का दीपक जलाएं — विशेष रूप से सरसों के तेल का दीपक सर्वोत्तम माना गया है।#तेल दीपक#सरसों तेल#दीपदान
पूजा विधिप्रदोष काल में दीपदान?इस पूजा में दो दीपक जलाए जाते हैं। पहला 'शुद्ध घी' का दीपक शिव जी के लिए, और दूसरा 'सरसों के तेल' का दीपक घर के बाहर पीपल के पेड़ के नीचे पितरों के लिए।#दीपदान#पितृ हेतु#शिव हेतु
जीवन एवं मृत्युदीपदान का क्या महत्व है?दीपदान से यममार्ग के अंधकार में प्रकाश मिलता है। दशगात्र में प्रतिदिन दीप का प्रावधान है। सांयकाल घट पर दीप प्रेत का मार्गदर्शक है। श्राद्ध में जलाया दीप पितर-पथ को प्रकाशित करता है।#दीपदान#महत्व#यममार्ग
गृह आचार एवं पूजा विधिघर में दीपावली के दीये कहाँ-कहाँ रखने चाहिए?मुख्य द्वार, तुलसी चौरा, मंदिर/पूजाघर, रसोई, घर के कोने, छत, खिड़कियाँ और दक्षिण दिशा में पितरों के लिए — इन सभी स्थानों पर दीये रखें। मिट्टी के दीये और घी-तेल सर्वोत्तम हैं।#दीपावली#दीपदान#लक्ष्मी पूजन
पर्वदेव दीपावली पर काशी में दीपदान का क्या विधान हैकाशी देव दीपावली: कार्तिक पूर्णिमा। प्रातः गंगा स्नान → शिव पूजा (त्रिपुरारि) → सन्ध्या में 84 घाटों पर लाखों दीये → दशाश्वमेध घाट महा गंगा आरती → गंगा में दीये प्रवाहित → रात्रि जागरण। स्कन्द पुराण: दीपदान = सर्वपापनाश। शिव का त्रिपुरासुर वध उपलक्ष्य।#देव दीपावली#काशी#दीपदान
व्रत एवं पर्वकार्तिक मास में स्नान और दीपदान का क्या विधान हैकार्तिक = सबसे पवित्र मास (पद्मपुराण)। स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में नदी/घर पर, सर्वपापनाशक। दीपदान: सन्ध्याकाल में तुलसी/पीपल/मन्दिर/नदी तट पर — घी/तिल तेल के मिट्टी दीये। तुलसी पूजा नित्य। कार्तिक पूर्णिमा = देव दीपावली। दान का विशेष पुण्य।#कार्तिक#स्नान#दीपदान
त्योहार पूजादीपावली पर तेरह दीपक कहाँ कहाँ रखें?13 दीपक स्थान: पूजा स्थल, मुख्य द्वार, देहली, तुलसी, रसोई, तिजोरी, जल स्रोत, गोशाला, पीपल/बरगद, चौराहा (यमराज — दक्षिण दिशा), छत (पितर हेतु), शौचालय बाहर, अन्न भण्डार। तिल तेल, मिट्टी दीये, रात भर प्रज्वलित।#दीपावली दीपक#तेरह दीपक#दीपदान
मंदिर दानमंदिर में दीपदान करने का क्या विशेष महत्व है?अग्निपुराण: 'दीपदान = व्रत+योग+मोक्ष।' मंदिर में दीपदान = लक्ष्मी कृपा, दीर्घायु, नेत्र ज्योति, अकाल मृत्यु से रक्षा। घी+तिल = अश्वमेध समान। विधि: मिट्टी दीया+घी/तिल तेल → संकल्प मंत्र → देवता के सामने। कार्तिक सर्वश्रेष्ठ। दीपक ही सम्पूर्ण पूजा।#दीपदान#दीप#प्रकाश दान
पूजा नियमसंध्या के समय दीपक कहाँ कहाँ रखना चाहिए?संध्या काल में दीपक पूजा घर, तुलसी के पास, मुख्य द्वार, दक्षिण दिशा और रसोई में रखना चाहिए। घी का दीपक सर्वोत्तम है। दीपक बुझने न दें और 'शुभं करोति...' श्लोक का पाठ करें।#संध्या दीपक#सायं दीपक#दीपदान