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महाभारत रामायण

महाभारत और रामायण की कथाएँ, पात्र, शिक्षाएँ, मेघनाद — सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर।

67प्रश्नोत्तर
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हनुमान जी ने लंका क्यों जलाई — आध्यात्मिक अर्थ?

लंका=अहंकार(सोने का वैभव)। जलाना=अहंकार दहन। पूँछ=इंद्रियाँ। ज्ञान अग्नि=अज्ञान जलाती(गीता 4.37)। एक भक्त=पूरा साम्राज्य। भक्ति शक्ति=असीम।

देव कथाहनुमानलंका दहन
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कृष्ण को मक्खन प्रिय क्यों — आध्यात्मिक अर्थ?

दूध मथो=मक्खन(सार)। साधना=हृदय मंथन→भक्ति=मक्खन। शुद्ध+कोमल हृदय=कृष्ण निवास। चोरी=बिना माँगे हृदय चुराते। 'मक्खन नहीं, प्रेम चाहिए'—कृष्ण।

देव कथाकृष्णमक्खन
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कार्तिकेय को षष्ठी को क्यों पूजा जाता है?

कार्तिकेय को षष्ठी को इसलिए पूजा जाता है क्योंकि पुराणों के अनुसार उनका जन्म षष्ठी तिथि को हुआ था। उनकी पत्नी देवसेना को 'षष्ठी माता' भी कहते हैं। दक्षिण भारत में स्कंद षष्ठी इस कारण विशेष पर्व है।

कार्तिकेय कथाकार्तिकेय षष्ठीछठ पूजा
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अशोक वाटिका में सीता जी के पास कौन था?

अशोक वाटिका में सीता जी की सबसे प्रमुख और सच्ची साथी त्रिजटा थीं, जो विभीषण की पुत्री और रामभक्त थीं। अन्य राक्षसियाँ सीता को प्रताड़ित करती थीं, पर त्रिजटा ने उन्हें हमेशा धैर्य और रामनाम से सहारा दिया।

रामायणअशोक वाटिकासीता
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छह कृत्तिकाओं ने कार्तिकेय को दूध कैसे पिलाया?

शरवण वन में प्रकट हुए छह शिशुओं का रुदन सुनकर कृत्तिका नक्षत्र की छह देवियाँ आईं। उनके मन में मातृत्व भाव जागा और उन्होंने एक-एक बालक को अपने स्तन से दूध पिलाया। इसीलिए कार्तिकेय, कृत्तिका-पुत्र 'कार्तिकेय' कहलाए।

कार्तिकेय कथाकृत्तिकाएंकार्तिकेय स्तनपान
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इंद्रजीत का यज्ञ क्यों था और उसे क्यों तोड़ा गया

निकुंभला यज्ञ से मेघनाद को अजेय दिव्य रथ मिलता — ब्रह्मा का वरदान था। परंतु यज्ञ भंग होने पर वह मारा जाएगा — यह शर्त थी। विभीषण के मार्गदर्शन में हनुमान और लक्ष्मण ने यज्ञ भंग कर मेघनाद को वध-योग्य बनाया।

मेघनाद चरित्रनिकुंभला यज्ञमेघनाद
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मेघनाद की पत्नी का नाम क्या था

मेघनाद की पत्नी का नाम सुलोचना था — जो नागराज वासुकि की पुत्री और नागकन्या थीं। वे पतिव्रता के लिए प्रसिद्ध हैं। पति के वध के बाद वे सती हो गईं।

मेघनाद चरित्रसुलोचनामेघनाद पत्नी
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मेघनाद का वध कैसे हुआ

विभीषण के मार्गदर्शन में लक्ष्मण ने मेघनाद का निकुंभला यज्ञ भंग किया — जिससे उसकी अजेयता समाप्त हुई। फिर भीषण युद्ध में लक्ष्मण ने अंजलिकास्त्र से मेघनाद का सिर धड़ से अलग किया।

मेघनाद चरित्रमेघनाद वधलक्ष्मण
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रामायण में मेघनाद ने कौन सा अस्त्र लक्ष्मण पर चलाया था

रामायण में मेघनाद ने लक्ष्मण पर 'शक्ति अस्त्र' चलाया था। कुछ परंपराओं में इसे वासवी शक्ति (इंद्र का अमोघ अस्त्र) बताया जाता है। इस बाण से लक्ष्मण मूर्छित हुए जिनके लिए संजीवनी बूटी लानी पड़ी।

मेघनाद चरित्रमेघनाद लक्ष्मणशक्ति अस्त्र
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मेघनाद ने शक्ति अस्त्र से लक्ष्मण को कैसे मूर्छित किया

मेघनाद ने पीछे से वासवी शक्ति (इंद्र की शक्ति) लक्ष्मण पर चलाई — जो सीने में लगी और लक्ष्मण मूर्छित हो गए। हनुमान संजीवनी बूटी लाए जिससे लक्ष्मण के प्राण बचे।

मेघनाद चरित्रशक्ति अस्त्र लक्ष्मणमेघनाद
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इंद्रजीत को यह नाम कैसे मिला

इंद्रजीत उपाधि ब्रह्मदेव ने दी — क्योंकि मेघनाद ने देवराज इंद्र को युद्ध में पराजित कर बंदी बनाया था। 'इंद्रजीत' = इंद्र को जीतने वाला। जन्म-नाम 'मेघनाद' था।

मेघनाद चरित्रइंद्रजीत नामइंद्र विजय
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मेघनाद ने इंद्र को कैसे हराया था

मेघनाद अदृश्य दिव्य रथ पर अकेले इंद्र की पूरी सेना से लड़ा और इंद्र को बंदी बनाकर लंका लाया। तब ब्रह्मा ने मध्यस्थता की और उसे 'इंद्रजीत' की उपाधि दी।

मेघनाद चरित्रमेघनाद इंद्र युद्धदेवासुर संग्राम
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मेघनाद के पास कौन-कौन से दिव्य अस्त्र थे

मेघनाद के पास ब्रह्मास्त्र (ब्रह्मा), नारायणास्त्र (विष्णु), पाशुपतास्त्र (शिव) — त्रिदेव के तीनों महास्त्र थे। साथ ही नागपाश, नागास्त्र, अदृश्य दिव्य रथ और अक्षय तरकश भी था।

मेघनाद चरित्रमेघनाद अस्त्रब्रह्मास्त्र
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कृष्ण की बांसुरी का आध्यात्मिक अर्थ?

बांसुरी=खाली बांस=अहंकार शून्य→ईश्वर दिव्य संगीत बजाते। छेद=कष्ट(कष्ट बिना संगीत नहीं)। कृष्ण होंठ=निकटतम। ध्वनि=ईश्वर पुकार(गोपियाँ दौड़ीं)। खाली हो जाओ=कृष्ण बजाएंगे।

देव कथाकृष्णबांसुरी
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सात लोक कौन से हैं और उनका क्या वर्णन?

7 ऊर्ध्व लोक: भूलोक→भुवर्लोक→स्वर्लोक→महर्लोक→जनलोक→तपलोक→सत्यलोक (ब्रह्मलोक)। 7 अधो लोक (पाताल): अतल→वितल→सुतल→तलातल→महातल→रसातल→पाताल। विष्णु पुराण और भागवत पुराण में विस्तृत वर्णन। कुल 14 लोक।

लोक वर्णनसात लोकचौदह लोक
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संजय को दिव्य दृष्टि किसने दी?

संजय को दिव्य दृष्टि महर्षि वेदव्यास ने दी थी ताकि वे कुरुक्षेत्र का युद्ध हस्तिनापुर में बैठे धृतराष्ट्र को सुना सकें। धृतराष्ट्र ने स्वयं दिव्य दृष्टि लेने से यह कहकर मना किया था कि वे अपने स्वजनों को लड़ते नहीं देख सकते।

महाभारतसंजयदिव्य दृष्टि
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पितृ लोक क्या है और पितर वहाँ कैसे रहते हैं?

पितृलोक भुवर्लोक/चंद्रलोक में स्थित है (विष्णु पुराण)। गीता (9.25): पितृ-भक्त पितृलोक जाते हैं। गरुड़ पुराण अनुसार कर्मों के आधार पर प्राप्त होता है। श्राद्ध-तर्पण से पितरों को तृप्ति मिलती है। दक्षिण दिशा पितरों की।

लोक वर्णनपितृ लोकपितर
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कलियुग कब समाप्त होगा शास्त्रों के अनुसार?

कलियुग की कुल अवधि 4,32,000 वर्ष। प्रारंभ 3102 ई.पू. — अभी ~5,128 वर्ष बीते, ~4,26,872 शेष। अंत में कल्कि अवतार आएंगे, फिर सतयुग प्रारंभ। 'जल्दी समाप्त होगा' जैसे दावे शास्त्र-विरुद्ध हैं।

युग वर्णनकलियुगयुग चक्र
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भीष्म पितामह की मृत्यु क्यों नहीं हुई बाणों पर?

भीष्म पितामह को उनके पिता शांतनु से इच्छामृत्यु का वरदान था इसलिए बाणों की शैया पर 58 दिन पड़े रहने पर भी वे जीवित रहे। वे उत्तरायण की प्रतीक्षा में थे क्योंकि शास्त्रों में उत्तरायण में मृत्यु को मोक्षदायी माना जाता है। मकर संक्रांति पर उन्होंने स्वेच्छा से प्राण त्यागे।

महाभारतभीष्म पितामहइच्छामृत्यु
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धृतराष्ट्र का विवाह गांधारी से क्यों हुआ?

भीष्म पितामह ने कुरु वंश के लिए धृतराष्ट्र का विवाह गांधार राजकुमारी गांधारी से कराया। गांधारी को पहले नहीं बताया गया था कि धृतराष्ट्र अंधे हैं। जब पता चला तो उन्होंने पतिव्रत-धर्म में आँखों पर पट्टी बाँध ली।

महाभारतधृतराष्ट्रगांधारी
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कृष्ण को 56 भोग क्यों लगाते?

इंद्र वर्षा 7 दिन→कृष्ण गोवर्धन उठाया→56 प्रहर(7×8) भूखे। 56 प्रहर=56 भोग(प्रत्येक प्रहर 1 व्यंजन)। अन्नकूट=गोवर्धन पूजा। 56=त्याग का प्रतिदान।

देव कथाकृष्ण56 भोग
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कार्तिकेय को मुरुगन और सुब्रमण्यम किस क्षेत्र में कहते हैं?

कार्तिकेय को 'मुरुगन' और 'सुब्रमण्यम' दक्षिण भारत में — विशेषतः तमिलनाडु में — कहा जाता है। तमिल परंपरा में मुरुगन सर्वाधिक लोकप्रिय देवता हैं और 'तमिल कडवुल' (तमिलों के देवता) कहे जाते हैं।

कार्तिकेय कथामुरुगनसुब्रमण्यम
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कार्तिकेय को छह सिर क्यों हैं?

कार्तिकेय को छह सिर इसलिए हैं क्योंकि उनका दिव्य तेज गंगाजल में बहकर छह भागों में विभाजित हो गया था और छह शिशुओं के रूप में प्रकट हुआ। माता पार्वती ने छहों को एक करके षड्मुख पुत्र प्राप्त किया।

कार्तिकेय कथाकार्तिकेय षड्मुखछह सिर
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यक्ष-युधिष्ठिर संवाद क्या है?

यक्ष-युधिष्ठिर संवाद वनपर्व का एक दार्शनिक प्रसंग है जिसमें यक्ष ने युधिष्ठिर से जीवन, धर्म और आश्चर्य पर प्रश्न पूछे। युधिष्ठिर ने सभी उत्तर दिए और चारों मूर्छित भाइयों को जीवित कराया। वह यक्ष वास्तव में यमराज थे।

महाभारतयक्ष प्रश्नयुधिष्ठिर
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हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाते — कथा?

सीता: 'राम आयु हेतु सिंदूर।' हनुमान: 'चुटकी=लाभ, तो पूरा शरीर=राम अमर!' पूरे शरीर पर लगाया। इसलिए मूर्ति सिंदूर लेपित। नारंगी सिंदूर+चमेली तेल(मंगलवार)। भोलेपन+परम भक्ति।

देव कथाहनुमानसिंदूर
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लक्ष्मण रेखा का असली रहस्य क्या है?

वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस के अरण्यकांड में लक्ष्मण रेखा का उल्लेख नहीं मिलता। यह परवर्ती रामायणों जैसे आनंदरामायण में आई और रामानंद सागर के धारावाहिक से लोकप्रिय हुई। तुलसीदास ने लंकाकांड में मंदोदरी के मुख से इसका अप्रत्यक्ष संकेत किया है।

रामायणलक्ष्मण रेखासीता हरण
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तारकासुर के वध के लिए शिव-पुत्र की जरूरत क्यों थी?

तारकासुर ने ब्रह्मा से यह वरदान लिया था कि उसका वध केवल शिव-पुत्र से होगा। उसने यह सोचकर यह माँगा था कि संन्यासी शिव का पुत्र कभी नहीं होगा। इस वरदान को पूरा करने के लिए ही कार्तिकेय का जन्म आवश्यक था।

कार्तिकेय कथातारकासुर वरदानशिव पुत्र
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रामायण किसने लिखी?

रामायण के रचयिता: महर्षि वाल्मीकि — 'आदिकवि'। 24,000 श्लोक, 7 काण्ड। राम के समकालीन — प्रत्यक्ष साक्षी कवि। पूर्व नाम रत्नाकर था। तुलसीदास की रामचरितमानस अलग (मध्यकाल, हिंदी) — स्मृति ग्रंथ। वाल्मीकि रामायण ही मूल प्रामाणिक।

इतिहास-पुराणरामायणवाल्मीकि
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महाभारत किसने लिखा?

महाभारत के रचयिता: महर्षि वेदव्यास (कृष्णद्वैपायन)। गणेश ने लेखनी से लिखा — परंपरागत आख्यान। एक लाख श्लोक, 18 पर्व। भगवद्गीता इसी का अंश। 'पंचम वेद' कहलाता है। व्यास ने 18 पुराण और ब्रह्मसूत्र भी रचे।

इतिहास-पुराणमहाभारतवेदव्यास
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सीता जी का जन्म कैसे हुआ?

वाल्मीकि रामायण के अनुसार राजा जनक के हल चलाते समय वैशाख शुक्ल नवमी को भूमि से एक कलश प्रकट हुआ जिसमें दिव्य कन्या थी। हल की नोक 'सीत' से स्पर्श होकर प्रकट होने से उनका नाम सीता पड़ा। वे भूमिजा, जानकी और मैथिली भी कहलाईं।

रामायणसीता जन्ममाता सीता
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शिव का वीर्य जो अग्नि में पड़ा उससे कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ?

शिव का दिव्य तेज अग्निदेव ने ग्रहण किया, फिर गंगा को सौंपा। गंगाजल में बहकर वह छह भागों में विभाजित होकर शरवण वन में छह शिशुओं के रूप में प्रकट हुआ। कृत्तिकाओं ने उन्हें दूध पिलाया और पार्वती ने छहों को एक करके षड्मुख कार्तिकेय को प्राप्त किया।

कार्तिकेय कथाकार्तिकेय जन्मशिव तेज
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महाभारत में कितने पर्व हैं?

महाभारत में कुल 18 पर्व हैं। आदि, सभा, वन, विराट, उद्योग, भीष्म, द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक, स्त्री, शांति, अनुशासन, अश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक और स्वर्गारोहण पर्व। 18 की संख्या महाभारत के हर पक्ष में दिखती है।

महाभारतमहाभारत18 पर्व
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कुरुक्षेत्र युद्ध कितने दिन चला?

कुरुक्षेत्र युद्ध 18 दिन चला। पहले 10 दिन भीष्म, फिर 5 दिन द्रोण, 2 दिन कर्ण और अंतिम दिन शल्य सेनापति रहे। 18वें दिन दुर्योधन की मृत्यु के साथ युद्ध समाप्त हुआ और पांडवों की विजय हुई।

महाभारतकुरुक्षेत्रमहाभारत युद्ध
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महाभारत में एकलव्य ने किससे शिक्षा ली?

एकलव्य ने प्रत्यक्ष गुरु से नहीं, बल्कि वन में द्रोणाचार्य की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर उन्हें मन ही मन गुरु मानकर स्वयं धनुर्विद्या सीखी। द्रोण ने बाद में गुरुदक्षिणा में उसका दायाँ अंगूठा माँगा जो एकलव्य ने बिना हिचक दे दिया।

महाभारतएकलव्यगुरु द्रोण
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कृष्ण मोर पंख मुकुट क्यों पहनते?

कथा: मोर नाचे(बांसुरी)→पंख अर्पित→कृष्ण मुकुट धारण। पंख=ज्ञान नेत्र(Eye)। मोर=प्रेम(वर्षा नृत्य)। सोना नहीं=प्रकृति पंख=सादगी। प्रेम अर्पित=कृष्ण मुकुट पर।

देव कथाकृष्णमोर पंख
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देव लोक, ब्रह्म लोक, विष्णु लोक में क्या अंतर?

देवलोक (स्वर्ग) = इंद्र, अस्थायी (पुण्य क्षीण→वापसी)। ब्रह्मलोक (सत्यलोक) = ब्रह्मा, दीर्घकालिक (प्रलय तक)। विष्णुलोक (वैकुंठ) = विष्णु, शाश्वत (मोक्ष — वापसी नहीं)। गीता (15.6): 'यद्गत्वा न निवर्तन्ते' = वैकुंठ।

लोक वर्णनदेवलोकब्रह्मलोक
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सात पाताल लोक कौन से हैं?

7 पाताल (ऊपर→नीचे): अतल (बल), वितल (शिव/हाटकेश्वर), सुतल (राजा बलि — विष्णु द्वारपाल), तलातल (मायासुर), महातल (नाग), रसातल (दैत्य), पाताल (शेषनाग — स्वर्णमयी)। विष्णु/भागवत पुराण। ये नर्क नहीं, स्वर्ग से भी सुंदर।

लोक वर्णनसात पातालअधो लोक
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कार्तिकेय का जन्म क्यों हुआ था?

कार्तिकेय का जन्म तारकासुर के वध के लिए हुआ था। तारकासुर को यह वरदान था कि उसका वध केवल शिव-पुत्र से ही होगा। तीनों लोकों में उसके अत्याचार से त्रस्त देवताओं की रक्षा के लिए कार्तिकेय का अवतरण हुआ।

कार्तिकेय कथाकार्तिकेय जन्मतारकासुर
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कृष्ण ने सुदामा की गरीबी कैसे दूर की?

सुदामा=गरीब बालसखा, मुट्ठी चावल भेंट। कृष्ण ने खाए, बिना माँगे झोपड़ी→महल। 'माँगो मत, प्रेम दो=सब मिलेगा।' सच्ची मित्रता=धन नहीं देखती। मुट्ठी=करोड़ लौटे।

देव कथाकृष्णसुदामा
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कुंभकर्ण छह महीने क्यों सोता था?

कुंभकर्ण ने तपस्या से ब्रह्माजी को प्रसन्न किया और 'इंद्रासन' माँगना चाहा। पर देवताओं की प्रार्थना पर सरस्वती उसकी जिह्वा पर विराजी, जिससे मुख से 'निद्रासन' निकला। ब्रह्माजी ने तथास्तु कहा और वह छह-छह महीने सोने लगा।

रामायणकुंभकर्णब्रह्मा वरदान
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महाभारत युद्ध के बाद क्या हुआ पांडवों का?

युद्ध के बाद युधिष्ठिर ने कुछ वर्ष राज किया, फिर परीक्षित को राज्य सौंपकर पाँचों पांडव और द्रौपदी महाप्रस्थान पर निकले। यात्रा में एक-एक करके सभी गिरते गए। केवल युधिष्ठिर स्वर्गद्वार तक पहुँचे और सशरीर स्वर्ग में प्रवेश किया।

महाभारतपांडवमहाप्रस्थान
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कर्ण की असली माँ कौन थी?

कर्ण की असली माँ कुंती थीं। कुंती ने दुर्वासा ऋषि से प्राप्त मंत्र की परीक्षा करते हुए सूर्यदेव का आह्वान किया जिससे कर्ण जन्मे। किशोरावस्था में अविवाहित होने के कारण लोक-लाज से उन्होंने कर्ण को नदी में बहा दिया। सारथी अधिरथ की पत्नी राधा ने उनका पालन-पोषण किया।

महाभारतकर्णकुंती
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हनुमान जी को तेल क्यों चढ़ाते हैं?

कथा: लंका दहन→जलन→सीता ने तेल लगाया=तेल प्रिय। ब्रह्मचारी+पहलवान=तेल मालिश परंपरा। सिंदूर+तेल='चोला'=रक्षा कवच। चमेली तेल(मंगल)=सर्वोत्तम।

देव कथाहनुमानतेल
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शिवलोक रुद्रलोक और हाटकेश्वर का वर्णन कहाँ आता है?

शिवलोक, भूमिष्ठ रुद्रलोक और पातालस्थ हाटकेश्वर का वर्णन लिङ्गपुराण के विषयों में आता है।

लोक वर्णनशिवलोकरुद्रलोक
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अभिमन्यु चक्रव्यूह में कैसे फँसा?

तेरहवें दिन अर्जुन के दूर जाने पर द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह बनाया। अभिमन्यु व्यूह में घुसना जानते थे पर निकलना नहीं। अकेले छः परतें तोड़ने के बाद जयद्रथ ने शेष पांडवों को रोक दिया और कौरव महारथियों ने घेरकर अधर्मपूर्वक अभिमन्यु का वध किया।

महाभारतअभिमन्युचक्रव्यूह
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युद्ध से पहले दोनों पक्षों में कितने योद्धा थे?

महाभारत में कौरव पक्ष के पास 11 अक्षौहिणी और पांडव पक्ष के पास 7 अक्षौहिणी सेना थी। कुल 18 अक्षौहिणी — जो लाखों योद्धाओं के बराबर थी। 18 दिन के युद्ध के बाद दोनों पक्षों से मिलाकर केवल 18 के आसपास योद्धा जीवित बचे।

महाभारतकुरुक्षेत्रसेना
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उत्तरा के गर्भ को कृष्ण ने कैसे बचाया?

अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से उत्तरा के गर्भ में पल रहे परीक्षित की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने सूक्ष्म रूप धारण करके गर्भ में प्रवेश किया और अपनी दिव्य शक्ति से ब्रह्मास्त्र के प्रहार को निष्फल किया। परीक्षित मृत जन्मे, पर कृष्ण ने उन्हें पुनर्जीवित किया।

महाभारतउत्तरापरीक्षित
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पांडवों का अज्ञातवास कहाँ बीता?

पांडवों ने अपना एक वर्ष का अज्ञातवास राजस्थान स्थित मत्स्य देश की राजधानी विराट नगर (आधुनिक बैराठ) में राजा विराट के यहाँ भिन्न-भिन्न छद्मवेश धारण करके बिताया।

महाभारतपांडवअज्ञातवास
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विदुर कौन थे महाभारत में?

विदुर हस्तिनापुर के महामंत्री, धृतराष्ट्र और पांडु के भाई तथा यमराज के अवतार माने जाते हैं। दासी-पुत्र होने के बावजूद वे अपने नैतिक बल, ज्ञान और सत्यनिष्ठा से महाभारत के सबसे आदरणीय पात्र बने। उन्होंने सदैव धर्म और पांडवों का साथ दिया।

महाभारतविदुरधर्मराज
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कृष्ण ने अर्जुन को गीता क्यों सुनाई?

कुरुक्षेत्र में युद्ध से पहले अर्जुन अपने स्वजनों को देखकर मोह और शोक में डूब गए और युद्ध करने से इनकार कर बैठे। उनके इस अज्ञानजनित मोह को दूर करने और धर्म के सही स्वरूप को समझाने के लिए श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया।

महाभारतगीताकृष्ण
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द्युत सभा में द्रौपदी को दाँव क्यों लगाया गया?

शकुनि की चाल में फँसे युधिष्ठिर ने सब कुछ हारने के बाद द्रौपदी को दाँव पर इसलिए लगाया क्योंकि शकुनि ने लालच दिया कि यदि वे जीते तो अपने सभी भाई और स्वयं को वापस पा लेंगे। यह उनकी महान भूल थी जो महाभारत के युद्ध का कारण बनी।

महाभारतद्रौपदीद्युत
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द्रौपदी का स्वयंवर क्यों रखा गया?

द्रौपदी का स्वयंवर राजा द्रुपद ने इसलिए रखा क्योंकि वे चाहते थे कि अर्जुन उनकी पुत्री से विवाह करे, जिससे द्रोणाचार्य को पराजित करने की शक्ति उन्हें मिल सके। स्वयंवर की शर्त जानबूझकर ऐसी रखी गई जो केवल अर्जुन जैसा धनुर्धर ही पूरा कर सके।

महाभारतद्रौपदीस्वयंवर
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महाभारत की कहानी क्या है?

महाभारत वेदव्यास रचित 1,00,000 श्लोक, 18 पर्वों का विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य है। पांडव और कौरव के बीच हस्तिनापुर के सिंहासन के लिए संघर्ष — द्यूत, वनवास, 18 दिन का कुरुक्षेत्र युद्ध। श्री कृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का ज्ञान इसी युद्ध में दिया।

महाभारत परिचयमहाभारतकुरुक्षेत्र
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रामायण किसने लिखी?

वाल्मीकि रामायण महर्षि वाल्मीकि द्वारा संस्कृत में रचित है — 24,000 श्लोक, 7 कांड। यह 'आदिकाव्य' है। रामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास द्वारा अवधी में 16वीं शताब्दी में रचित है — उत्तर भारत में सर्वाधिक प्रचलित। 'रामो विग्रहवान् धर्मः' — राम धर्म का मूर्त स्वरूप हैं।

रामायण परिचयरामायणवाल्मीकि
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कार्तिकेय को स्कंद क्यों कहते हैं?

कार्तिकेय को 'स्कंद' इसलिए कहते हैं क्योंकि उनका जन्म शिव-तेज के गंगाजल में स्खलित होने से शरवण वन में हुआ। 'स्कंद' का अर्थ है स्खलित होकर प्रकट होने वाला। शत्रु-सेना को छिन्न करने वाले योद्धा के अर्थ में भी यह नाम सार्थक है।

कार्तिकेय कथास्कंदकार्तिकेय
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अर्जुन का गांडीव धनुष कहाँ से मिला?

गांडीव धनुष मूलतः वरुणदेव के पास था जिसे उन्होंने अग्निदेव को दिया। खांडव वन दाह के समय अग्निदेव ने अर्जुन को यह दिव्य धनुष और अक्षय तरकश प्रदान किया। इसीलिए अर्जुन 'गांडीवधारी' कहलाए।

महाभारतगांडीवअर्जुन
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कुंती ने कर्ण को नदी में क्यों छोड़ा?

कुंती ने अविवाहित अवस्था में सूर्यदेव के वरदान से कर्ण को जन्म दिया था। उस युग में अविवाहित माँ का होना घोर सामाजिक अपमान था। लोक-लाज और परिवार की मर्यादा के भय से उन्होंने उस नवजात को नदी में बहा दिया।

महाभारतकुंतीकर्ण
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द्रौपदी के पाँच पुत्रों के नाम?

द्रौपदी के पाँच पुत्र थे — युधिष्ठिर से प्रतिविन्ध्य, भीम से सुतसोम, अर्जुन से श्रुतकर्मा, नकुल से शतानीक और सहदेव से श्रुतसेन। इन्हें उपापांडव कहा जाता है। युद्ध की अंतिम रात अश्वत्थामा ने इन सभी को सोते समय मार दिया।

महाभारतद्रौपदीउपपांडव
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कृष्ण रास लीला का आध्यात्मिक अर्थ?

गोपी=जीवात्मा, कृष्ण=परमात्मा, रास=आत्मा-परमात्मा मिलन। प्रत्येक गोपी साथ=ईश्वर सबके+व्यक्तिगत। सब छोड़ना=पूर्ण समर्पण। विरह=भक्ति चरम। भागवत: कामदेव जीतने वाले=काम नाश।

देव कथाकृष्णरास लीला
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गांधारी ने आँखों पर पट्टी क्यों बाँधी?

गांधारी ने विवाह के बाद जब जाना कि उनके पति धृतराष्ट्र नेत्रहीन हैं, तब पतिव्रत-धर्म की भावना से अपनी आँखों पर पट्टी बाँध ली — 'जब पति संसार नहीं देख सकते तो मुझे क्या अधिकार।' यह भारतीय साहित्य में आत्मत्याग का अनुपम उदाहरण है।

महाभारतगांधारीआँखों की पट्टी
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महाभारत रामायण — प्रश्नोत्तर

महाभारत रामायण से सम्बन्धित 67+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। सनातन धर्म के विद्वानों द्वारा दिए गए इन उत्तरों में वेद, पुराण, उपनिषद और शास्त्रों के प्रमाण दिए गए हैं। यदि आप महाभारत रामायण के बारे में कोई भी प्रश्न खोज रहे हैं — चाहे विधि हो, नियम हो, सामग्री हो या लाभ — तो यहाँ आपको शास्त्रसम्मत उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर में स्रोत, विधि और व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया है।

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