विस्तृत उत्तर
द्रौपदी ने पाँचों पांडवों से एक-एक वर्ष के अंतराल पर एक-एक पुत्र को जन्म दिया। इन पाँचों पुत्रों को 'उपापांडव' या 'पंचकुमार' कहा जाता है।
पाँचों पुत्रों के नाम इस प्रकार हैं: युधिष्ठिर से जन्मे पुत्र का नाम 'प्रतिविन्ध्य' था, भीमसेन से जन्मे पुत्र का नाम 'सुतसोम' था, अर्जुन से जन्मे पुत्र का नाम 'श्रुतकर्मा' था, नकुल से जन्मे पुत्र का नाम 'शतानीक' था और सहदेव से जन्मे पुत्र का नाम 'श्रुतसेन' था।
इन पाँचों ने महाभारत युद्ध में पांडवों की ओर से भाग लिया। इनके बारे में महाभारत में विस्तृत वर्णन नहीं मिलता, परंतु इनकी वीरता के कुछ प्रसंग अवश्य हैं। प्रतिविन्ध्य ने युद्ध के 15वें दिन अश्वत्थामा का वीरतापूर्वक सामना किया था।
इन सभी पुत्रों का दुखद अंत युद्ध की अंतिम रात को हुआ। जब पांडव और श्रीकृष्ण ओधवती नदी के तट पर थे, तब अश्वत्थामा ने पांडव शिविर में घुसकर इन सभी पाँच कुमारों को निद्रावस्था में यह सोचकर मार डाला कि वे पांडव हैं। यह नरसंहार रात्रि के अंधकार में हुआ और द्रौपदी के लिए यह सबसे बड़ा आघात था। अश्वत्थामा के इस जघन्य कृत्य के कारण श्रीकृष्ण ने उन्हें घोर शाप दिया।





