ग्रहण काल में दान करने से पुण्य कई गुना क्यों बढ़ता है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
ग्रहण दान: पुण्यकाल (करोड़गुना — स्मृति), सन्धि काल=कर्मफल तीव्र, अशुद्धि में त्याग=अधिक पुण्य। तिल, अन्न, वस्त्र, ताँबा/चाँदी। ग्रहण मोक्ष समय सर्वोत्तम।
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