विस्तृत उत्तर
कुतुप मुहूर्त का समय शास्त्रों में निर्धारित विशिष्ट समयावधि है। स्पष्ट उत्तर के अनुसार कुतुप मुहूर्त का समय पूर्वाह्न 11:53 से अपराह्न 12:44 तक है। इसका आरंभ पूर्वाह्न 11:53 बजे होता है, अर्थात् दोपहर से ठीक पहले, और समाप्ति अपराह्न 12:44 बजे होती है, अर्थात् दोपहर के थोड़ी देर बाद। कुल अवधि लगभग 51 मिनट की है।
शास्त्रीय महत्त्व के अनुसार यह सूर्य के पूर्ण प्रभाव का समय है, और माना जाता है कि इस मुहूर्त में पितर अत्यंत प्रसन्नता से उपस्थित होते हैं। तीन शास्त्रीय मुहूर्तों में इसका स्थान सबसे पहले है। पहला कुतुप मुहूर्त 11:53 से 12:44 तक, फिर रौहिण मुहूर्त 12:44 से 01:34 तक, और अंत में अपराह्न काल 01:34 से 04:04 तक। तीनों का क्रम भी निश्चित है, कुतुप के तुरंत बाद रौहिण आरंभ होता है, और रौहिण के बाद अपराह्न काल। तीनों मिलकर श्राद्ध का सम्पूर्ण समय बनाते हैं।
इस समय में कई महत्वपूर्ण घटनाएँ होती हैं। सूर्य का पूर्ण प्रभाव होता है, अर्थात् सूर्य आकाश में मध्य के निकट होता है और अधिकतम ऊर्जा होती है। पितर अत्यंत प्रसन्नता से उपस्थित होते हैं और स्वागत के लिए तत्पर रहते हैं। श्राद्ध का आरंभ इसी मुहूर्त से होता है, और तर्पण की तैयारी की जाती है।
इस समय में कर्ता को पितरों का आवाहन, कुशा बिछाना, सामग्री तैयार करना और प्रारम्भिक मंत्र जप आदि कार्य करने चाहिए। इस मुहूर्त का महत्व यह है कि यह श्राद्ध आरंभ का सर्वोत्तम समय है, और इस समय में पितर सबसे अधिक प्रसन्न होते हैं। व्यावहारिक मार्गदर्शन के अनुसार 11:53 से पहले सब तैयारी कर लेनी चाहिए, ठीक 11:53 पर श्राद्ध आरंभ करना चाहिए, 12:44 तक प्रारम्भिक चरण पूरा कर लेना चाहिए, और फिर रौहिण मुहूर्त में तर्पण करना चाहिए। निष्कर्षतः कुतुप मुहूर्त का समय पूर्वाह्न 11:53 से अपराह्न 12:44 तक है, जो लगभग 51 मिनट का होता है। यह सूर्य के पूर्ण प्रभाव का समय है, जब पितर अत्यंत प्रसन्नता से उपस्थित होते हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक

