विस्तृत उत्तर
श्राद्ध करने का सही समय केवल दोपहर का समय है, अर्थात् मध्याह्न के पश्चात्। शास्त्रीय आधार के अनुसार श्राद्ध कर्म कभी भी प्रातःकाल, सूर्यास्त के पश्चात् या रात्रि में नहीं किया जाना चाहिए। वायु पुराण और अन्य ग्रंथों के अनुसार पितरों का समय मध्याह्न के पश्चात् का होता है। मूल सिद्धांत यह है कि पितरों का समय मध्याह्न के पश्चात् होता है, अर्थात् दोपहर के बाद का समय।
शास्त्रों में श्राद्ध के लिए दिन के तीन विशिष्ट मुहूर्तों को सबसे पवित्र माना गया है। पहला है कुतुप मुहूर्त, जिसका समय पूर्वाह्न 11:53 से अपराह्न 12:44 तक है। शास्त्रीय महत्त्व के अनुसार यह सूर्य के पूर्ण प्रभाव का समय है, और माना जाता है कि इस मुहूर्त में पितर अत्यंत प्रसन्नता से उपस्थित होते हैं। दूसरा है रौहिण मुहूर्त, जिसका समय अपराह्न 12:44 से अपराह्न 01:34 तक है। यह कुतुप के ठीक बाद का समय है, जो तर्पण और पिण्डदान की प्रक्रिया के लिए उत्तम है। तीसरा है अपराह्न काल, जिसका समय अपराह्न 01:34 से अपराह्न 04:04 तक है। यदि पूर्व मुहूर्तों में कार्य पूर्ण न हो, तो इस काल तक ब्राह्मण भोजन और विसर्जन संपन्न कर लेना चाहिए।
इन तीनों मुहूर्तों का क्रम इस प्रकार है, पहले कुतुप मुहूर्त 11:53 से 12:44 तक, जो पितरों के स्वागत और प्रसन्नता का समय है। फिर रौहिण मुहूर्त 12:44 से 01:34 तक, जो तर्पण और पिण्डदान का समय है। अंत में अपराह्न मुहूर्त 01:34 से 04:04 तक, जो ब्राह्मण भोजन और विसर्जन का समय है। प्रातःकाल, सूर्यास्त के पश्चात् और रात्रि, ये तीनों समय वर्जित हैं।
इन तीनों मुहूर्तों के विशेष होने के कारण भी हैं। कुतुप मुहूर्त में सूर्य अपने पूर्ण प्रभाव में होता है और पितर प्रसन्नता से उपस्थित होते हैं। रौहिण मुहूर्त तर्पण-पिण्डदान के लिए सर्वोत्तम है। अपराह्न काल में ब्राह्मण भोजन और श्राद्ध की समाप्ति होती है। व्यावहारिक मार्गदर्शन के अनुसार सबसे पहले कुतुप मुहूर्त में आरंभ करें, फिर रौहिण मुहूर्त में तर्पण-पिण्डदान करें, और अपराह्न काल तक ब्राह्मण भोजन समाप्त कर लें, इस तरह सूर्यास्त से पहले सब कुछ पूरा हो जाता है। यह सूक्ष्म समय निर्धारण सिद्ध करता है कि श्राद्ध केवल कर्म नहीं, बल्कि काल का अनुष्ठान भी है। शास्त्रीय स्रोत के रूप में वायु पुराण, आश्वलायन गृह्यसूत्र, गरुड़ पुराण और याज्ञवल्क्य स्मृति इसका प्रमाण देते हैं। निष्कर्षतः श्राद्ध का सही समय मध्याह्न के पश्चात् है, और तीन शास्त्रीय मुहूर्तों में किया जाना चाहिए, अर्थात् कुतुप मुहूर्त 11:53 से 12:44 तक, रौहिण मुहूर्त 12:44 से 01:34 तक, और अपराह्न काल 01:34 से 04:04 तक।
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