विस्तृत उत्तर
तंत्र का असली अर्थ तंत्रालोक और महानिर्वाण तंत्र में विस्तार से वर्णित है:
'तंत्र' की व्युत्पत्ति
तन्यते विस्तार्यते ज्ञानं येन तत् तंत्रम्।' — जिससे ज्ञान का विस्तार हो, वह तंत्र है।
द्वितीय: 'तन्' (विस्तार) + 'त्र' (त्राण/रक्षा) — जो ज्ञान का विस्तार करे और रक्षा करे।
तंत्र क्या नहीं है
लोक में 'तंत्र' को काला जादू, वशीकरण या हानि पहुँचाने की विद्या समझा जाता है — यह घोर भ्रांति है। कुलार्णव तंत्र स्पष्ट करता है: 'तंत्र = मोक्ष का मार्ग।'
तंत्र का असली अर्थ
- 1ब्रह्मांड और व्यक्ति की एकता — 'यत् पिण्डे तत् ब्रह्मांडे।' जो शरीर में है, वही ब्रह्मांड में है।
- 2शक्ति की उपासना — ब्रह्मांड की मूल शक्ति को जगाना।
- 3देह को साधन बनाना — वेदांत में देह माया है; तंत्र में देह ही मंदिर है।
- 4त्वरित मार्ग — वर्षों के तप का फल तंत्र साधना से शीघ्र (किंतु जोखिम भी अधिक)।
तंत्रालोक (अभिनवगुप्त)
तंत्र = शिव और शक्ति की एकता का विज्ञान। शिव = चेतना, शक्ति = ऊर्जा। तंत्र = दोनों को जानना और अनुभव करना।
सारांश
तंत्र एक विज्ञान है — शरीर, मन और ब्रह्मांड की शक्तियों को जानने, जगाने और मोक्ष प्राप्त करने का विज्ञान।





