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तंत्र परिचय📜 तंत्रालोक (अभिनवगुप्त), महानिर्वाण तंत्र, कुलार्णव तंत्र2 मिनट पठन

तंत्र साधना का असली अर्थ क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

तंत्र का असली अर्थ: 'जिससे ज्ञान का विस्तार हो।' तंत्र = शरीर को मंदिर मानकर ब्रह्मांड की शक्ति जगाना। तंत्रालोक: शिव (चेतना) + शक्ति (ऊर्जा) की एकता का विज्ञान। काला जादू नहीं — मोक्ष का त्वरित मार्ग। 'यत् पिण्डे तत् ब्रह्मांडे।'

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विस्तृत उत्तर

तंत्र का असली अर्थ तंत्रालोक और महानिर्वाण तंत्र में विस्तार से वर्णित है:

'तंत्र' की व्युत्पत्ति

तन्यते विस्तार्यते ज्ञानं येन तत् तंत्रम्।' — जिससे ज्ञान का विस्तार हो, वह तंत्र है।

द्वितीय: 'तन्' (विस्तार) + 'त्र' (त्राण/रक्षा) — जो ज्ञान का विस्तार करे और रक्षा करे।

तंत्र क्या नहीं है

लोक में 'तंत्र' को काला जादू, वशीकरण या हानि पहुँचाने की विद्या समझा जाता है — यह घोर भ्रांति है। कुलार्णव तंत्र स्पष्ट करता है: 'तंत्र = मोक्ष का मार्ग।'

तंत्र का असली अर्थ

  1. 1ब्रह्मांड और व्यक्ति की एकता — 'यत् पिण्डे तत् ब्रह्मांडे।' जो शरीर में है, वही ब्रह्मांड में है।
  2. 2शक्ति की उपासना — ब्रह्मांड की मूल शक्ति को जगाना।
  3. 3देह को साधन बनाना — वेदांत में देह माया है; तंत्र में देह ही मंदिर है।
  4. 4त्वरित मार्ग — वर्षों के तप का फल तंत्र साधना से शीघ्र (किंतु जोखिम भी अधिक)।

तंत्रालोक (अभिनवगुप्त)

तंत्र = शिव और शक्ति की एकता का विज्ञान। शिव = चेतना, शक्ति = ऊर्जा। तंत्र = दोनों को जानना और अनुभव करना।

सारांश

तंत्र एक विज्ञान है — शरीर, मन और ब्रह्मांड की शक्तियों को जानने, जगाने और मोक्ष प्राप्त करने का विज्ञान।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्रालोक (अभिनवगुप्त), महानिर्वाण तंत्र, कुलार्णव तंत्र
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