विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना का परिचय महानिर्वाण तंत्र, कुलार्णव तंत्र और अभिनवगुप्त के तंत्रालोक में विस्तार से मिलता है:
'तंत्र' शब्द का अर्थ
संस्कृत में 'तंत्र' की व्युत्पत्ति इस प्रकार है:
- ▸तन् = विस्तार करना
- ▸त्र = रक्षा करना
महानिर्वाण तंत्र में कहा गया है:
> 'तनोति विपुलान् अर्थान् तत्त्वमन्त्रसमन्वितान्। त्राणं च कुरुते यस्मात् तंत्रमित्यभिधीयते।'
— जो तत्त्व और मंत्र से युक्त विपुल ज्ञान का विस्तार करे और रक्षा करे — वह तंत्र है।
तंत्र क्या है
तंत्र भारत की एक प्राचीन साधना पद्धति है जिसमें तीन स्तंभ हैं:
- 1मंत्र — ध्वनि शक्ति
- 2यंत्र — ज्यामितीय ऊर्जा आकृति
- 3तंत्र — विधि और अनुष्ठान
तंत्र के तीन मार्ग
| मार्ग | स्वरूप | किसके लिए |
|-------|--------|----------|
| दक्षिणाचार | सात्विक पूजा, मंत्र, यंत्र | सामान्य साधक |
| वामाचार | उग्र साधना, पंचमकार | दीक्षित, अनुभवी |
| कौलाचार | सर्वोच्च — द्वैत से अद्वैत | सिद्ध गुरु |
तंत्र का उद्देश्य
तंत्र का अंतिम लक्ष्य मोक्ष है — किंतु मार्ग में भोग और सिद्धि भी स्वीकार हैं। तंत्रालोक में अभिनवगुप्त कहते हैं — 'तंत्र जीवन का पूर्ण स्वीकार है — न पलायन।'
तंत्र बनाम वेद
वेद ज्ञान मार्ग है; तंत्र शक्ति उपासना का क्रियात्मक मार्ग है। दोनों परस्पर पूरक हैं।
तंत्र की परंपराएं
- ▸शैव तंत्र (कश्मीर शैवाद्वैत)
- ▸शाक्त तंत्र (काली, दुर्गा, त्रिपुर सुंदरी)
- ▸वैष्णव तंत्र (पांचरात्र आगम)
- ▸बौद्ध तंत्र (वज्रयान)





