विस्तृत उत्तर
माँ त्रिपुर सुंदरी का ध्यान श्लोक:
बालार्कायुततेजसं त्रिनयनां रक्ताम्बरोल्लासिनीम्। नानालंकृतिराजमानवपुषं वोढुं रुचिं शेखराम्॥ हस्तैरिक्षुधनुः सृणिं सुमशरं पाशं मुदा बिभ्रतीम्। श्रीचक्रस्थितसुन्दरीं त्रिजगतामाधारभूतां स्मरेत्॥
अर्थ: दस सहस्र बाल सूर्यों के समान तेज वाली, तीन नेत्रों से युक्त, रक्तिम वस्त्रों से सुशोभित, विविध अलंकारों से देदीप्यमान, मस्तक पर अर्धचंद्र धारण की हुईं, जो अपने करकमलों में ईख का धनुष, अंकुश, पुष्पबाण और पाश प्रसन्नतापूर्वक धारण करती हैं, श्रीचक्र पर विराजमान उन त्रिपुर सुंदरी का, जो तीनों लोकों की आधारभूता हैं, मैं स्मरण करता हूँ।
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