आचमन में तीन बार जल ग्रहण करते हुए क्रमशः 'ॐ केशवाय नमः', 'ॐ नारायणाय नमः', 'ॐ माधवाय नमः' बोला जाता है। इससे पूर्व 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा...' मंत्र से पवित्रीकरण होता है। यह पूजा आरंभ की अनिवार्य शुद
आचमन का अर्थ है मंत्रोच्चारण के साथ पवित्र जल को तीन बार ग्रहण करना।
यह पूजा, यज्ञ या किसी भी धार्मिक कार्य के आरम्भ में शरीर, मन और हृदय की शुद्धि के लिए किया जाता है।