स्तोत्र
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आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ किस परिस्थिति में करना चाहिए?
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संक्षिप्त उत्तर
वाल्मीकि रामायण युद्ध काण्ड सर्ग 105: अगस्त्य→राम (थके+चिंतित) → तीन बार जप → रावण वध। परिस्थिति: विजय/सफलता, संकट/कष्ट, निराशा/थकान, सूर्य ग्रह शांति, नेत्र/हृदय रोग। सूर्योदय, 3 बार, रविवार। बिना दी
आदित्य हृदय स्तोत्र वाल्मीकि रामायण के युद्ध काण्ड (सर्ग 105) में वर्णित है।
अगस्त्य ऋषि ने रणभूमि में थके और चिंतित श्रीराम को रावण पर विजय हेतु यह स्तोत्र बताया। राम ने तीन बार जप कर रावण का वध किया।
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