आहत नाद — दो वस्तुओं के टकराने से बाहरी ध्वनि (घंटा, ढोल)। अनाहत नाद — बिना आघात के स्वतः विद्यमान ॐ का शाश्वत नाद। घंटाकर्णेश्वर वह तीर्थ है जहाँ आहत नाद अनाहत नाद में रूपांतरित होता है।
भारतीय नाद-योग में ध्वनि दो प्रकार की है — आहत नाद (Struck Sound) — वह ध्वनि जो दो वस्तुओं के टकराने से उत्पन्न होती है।
जैसे — घंटा बजाना, ढोल बजाना, ताली बजाना, बोलना। यह बाहरी, भौतिक और क्षणिक ध्वनि है — उत्पन्न होती है, गूँजती है, फिर शांत हो जाती है।