आरती में पंचमुखी घी का दीप जलाएं। चरणों से आरंभ करके ऊपर जाएं — दक्षिणावर्त (clockwise) घुमाएं। शंख-घंटी बजाते हुए देवता की स्तुति गाएं। अंत में कपूर आरती करें। आरती की लौ दोनों हाथों से स्पर्श करके न
आरती की शास्त्रोक्त विधि अग्नि पुराण और स्कंद पुराण में विस्तार से वर्णित है: आरती का अर्थ: 'आरती' = 'आ-रत्री' अर्थात् रात्रि के अंधकार को दूर करना।
या 'आर्तिका' — कष्टों को दूर करना। आरती में दीप की ज्योति से देवता को नीराजन (प्रकाश अर्पण) किया जाता है। आरती के प्रकार: 1।