अभय मुद्रा = भक्तों को दरिद्रता, भय और जीवन के संकटों से सुरक्षा। वरद मुद्रा = असीम उदारता और सत्कामनाओं की पूर्ति। जिनके पास श्री है उनका कर्तव्य समाज को भयमुक्त करना और दान देना है।
देवी के हाथों में दो प्रमुख मुद्राएँ हैं: अभय मुद्रा: यह भक्तों को दरिद्रता, भय और जीवन के संकटों से अभय (सुरक्षा) प्रदान करता है।
वरद मुद्रा: यह देवी की असीम उदारता और सभी सत्कामनाओं की पूर्ति का परिचायक है।