पूर्व जन्मों के प्रारब्ध कर्म का फल वर्तमान में दुख के रूप में आता है। अच्छे कर्मों का फल विलंब से मिलता है। गीता कहती है 'गहना कर्मणो गतिः' — कर्म की गति अत्यंत गहन है। दुख आत्मिक विकास का माध्यम भी
यह प्रश्न हिंदू दर्शन के सबसे गहन प्रश्नों में से एक है। शास्त्रों में इसके कई उत्तर दिए गए हैं: 1।
प्रारब्ध कर्म का फल: - वर्तमान जीवन का दुख पूर्व जन्मों के कर्मों (प्रारब्ध) का फल हो सकता है।