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अधिक मास में कौन से पुण्य कर्म करें
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संक्षिप्त उत्तर
पुरुषोत्तम मास पुण्य = कई गुना। विष्णु भक्ति (गीता/सहस्रनाम), दान (अन्न/वस्त्र/गो), व्रत, तीर्थ स्नान, भागवत कथा, तुलसी पूजा। शुभ कार्य वर्जित, पर पुण्य = अनंत।
अधिक मास = पुरुषोत्तम (विष्णु) मास; शुभ कार्य वर्जित, परंतु पुण्य कर्म = अत्यंत विशेष फलदायी। विशेष पुण्य कर्म: 1।
विष्णु/कृष्ण भक्ति — भगवद्गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम, कृष्ण भजन। दान — अन्नदान, वस्त्रदान, गोदान = अनंत गुना फल।
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