अद्वैत (शंकराचार्य): एक ही सत्ता सत्य = निर्गुण-निराकार परब्रह्म। माया से युक्त होने पर सगुण विष्णु/शिव। जीव और ब्रह्म तत्वतः एक। दृश्यमान जगत = माया-जनित मिथ्या। सगुण विष्णु भक्ति → चित्त शुद्धि → नि
अद्वैत वेदांत के प्रणेता आदि शंकराचार्य के मत के अनुसार, मूलतः एक ही सत्ता सत्य है — निर्गुण, निराकार परब्रह्म।
जब यह निर्गुण परब्रह्म अविद्या या त्रिगुणमयी माया से युक्त होता है, तब वह सगुण ईश्वर (सृष्टिकर्ता विष्णु या शिव) कहलाता है।