आघारावाज्यभागाहुति = अग्नि को सम्यक् प्रज्वलित करने के लिए वेदी के 4 स्थानों पर घी की आहुति: उत्तर = अग्नि (ज्ञान-प्रकाश); दक्षिण = सोम (शीतलता-शांति); मध्य = प्रजापति (सृजन); मध्य पुनः = इंद्र (शक्ति
यह देव-यज्ञ का एक अत्यंत गूढ़ और वैज्ञानिक चरण है।
'आघार' का अर्थ है घृत की सतत धार, और 'आज्यभाग' का अर्थ है घी का वह भाग जो विशिष्ट देवताओं को अग्नि के विशिष्ट कोनों में दिया जाता है।