अघोर शिव का वैदिक मंत्र है — 'ॐ अघोरेभ्यो अथ घोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यः। सर्वेभ्यः सर्वशर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्ररूपेभ्यः॥' (शुक्लयजुर्वेद)। तांत्रिक साधना-मंत्र है — 'ॐ ह्रौं अघोर शिवाय नमः'। 'अघोर' का
शिव के 'अघोर' स्वरूप का अर्थ है — जो किसी के लिए भी घोर (भयंकर) नहीं है, जो सबके लिए सुलभ और कल्याणकारी है।
अघोर वास्तव में शिव का अत्यंत शांत और अनुग्राही स्वरूप है — न कि भयंकर। 'अ+घोर' = जो घोर नहीं है, जो सहज है।