अघोरास्त्र स्तोत्र परविद्या के षट्कर्मों को 'दह छिंदी छिंदी' और 'इति कर्माण वृत्त फट् स्वाहा' से जलाकर और काटकर ध्वस्त कर देता है।
अघोरास्त्र स्तोत्र में स्पष्ट रूप से स्तम्भन, मोहन, वश्याकर्षण, उच्चाटन, कीलन और द्वेषण का उल्लेख है।
जब कोई शत्रु इन उग्र कर्मों का प्रयोग साधक के विरुद्ध करता है, तो स्तोत्र में निहित शक्ति इन 'श्री महादेव निर्मित' कर्मों को 'दह छिंदी छिंदी' (जलाकर और काटकर) ध्वस्त कर देती है।