अग्नि सूक्त ऋग्वेद का प्रथम सूक्त है। वैदिक अग्नि केवल भौतिक आग नहीं — वे देवों के मुख और यज्ञ के पुरोहित हैं। पृथ्वी पर यज्ञाग्नि, आकाश में विद्युत् और सूर्य में ऊर्जा — ये तीन अग्नि के रूप हैं। देवत
अग्नि सूक्त ऋग्वेद के प्रथम मण्डल का प्रथम सूक्त है — और यही विश्व के सबसे प्राचीन साहित्य का पहला सूक्त और पहला शब्द भी है।
इसके ऋषि मधुच्छन्दा वैश्वामित्र (विश्वामित्र के पुत्र) हैं, देवता अग्नि और छन्द गायत्री है। इसमें नौ मन्त्र हैं।