अग्निहोत्र दो समय: (1) प्रातः — सूर्योदय के ठीक समय ('सूर्याय स्वाहा') (2) सायं — सूर्यास्त के ठीक समय ('अग्नये स्वाहा')। संधिकाल में। गोबर कण्डे/समिधा + गाय का घी + चावल। श्रौत विधान में एक ऋत्विज् आ
अग्निहोत्र वैदिक धर्म का सबसे मूलभूत नित्य यज्ञ है जो प्रतिदिन दो बार — प्रातःकाल और सायंकाल — किया जाता है।
प्रातः अग्निहोत्र: सूर्योदय के ठीक समय पर। शास्त्रीय विधान में सूर्य की पहली किरण दिखते ही आहुति दी जाती है।