श्रीरामजी के चरण-स्पर्श से — 'परसत पद पावन सोक नसावन प्रगट भई तपपुंज सही' — पवित्र चरणों का स्पर्श पाते ही शिला से तपोमूर्ति अहल्या प्रकट हुईं। स्तुति करके आनन्दपूर्वक पतिलोक गयीं।
अहल्या का उद्धार श्रीरामजी के पवित्र चरणों के स्पर्श से हुआ।
मार्ग में एक आश्रम दिखा जहाँ कोई पशु-पक्षी नहीं था, केवल एक शिला (पत्थर) पड़ी थी। विश्वामित्रजी ने रामजी को सब कथा बताई।