क्षीरसागर मंथन
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अलक्ष्मी (ज्येष्ठा) कौन हैं?
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संक्षिप्त उत्तर
अलक्ष्मी (ज्येष्ठा) = दरिद्रता, कलह और दुर्भाग्य की अधिष्ठात्री। मलिन वस्त्र, लाल नेत्र, बूढ़ी, दंतहीन, भयंकर। मंथन में शुभ से पहले विकार-विष निकलते हैं — यह गहरा मनोवैज्ञानिक सत्य है।
पद्म पुराण, लिंग पुराण और अन्य ग्रंथों के अनुसार, मंथन से अमृत और शुभ रत्नों से पूर्व हलाहल विष और 'ज्येष्ठा' या 'अलक्ष्मी' की उत्पत्ति हुई।
अलक्ष्मी, जो दरिद्रता, कलह और दुर्भाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं, काषाय (मलिन) वस्त्र धारण किए हुए, लाल नेत्रों वाली, अत्यंत बूढ़ी, दंतहीन और भयंकर स्वरूप वाली थीं।
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