मुहूर्त एवं योग
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अमृत सिद्धि योग में पूजा का क्या विधान है
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संक्षिप्त उत्तर
अमृत सिद्धि योग: विशिष्ट वार + नक्षत्र (जैसे गुरुवार+पुष्य, शनिवार+रोहिणी)। कर्म = अमृत (शाश्वत) फल। मंत्र सिद्धि, औषधि आरम्भ, दीक्षा, गृह प्रवेश सर्वोत्तम। दान = अक्षय। सर्वार्थ सिद्धि से भिन्न — वह
अमृत सिद्धि योग अत्यन्त शुभ और दुर्लभ मुहूर्त योग है। कब बनता है: विशिष्ट वार + विशिष्ट नक्षत्र के संयोग से।
प्रमुख संयोग: - रविवार + हस्त - सोमवार + मृगशिरा - मंगलवार + अश्विनी - बुधवार + अनुराधा - गुरुवार + पुष्य - शुक्रवार + रेवती - शनिवार + रोहिणी पूजा का विधान: 1।
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