दक्षिणामूर्ति साधना
?
अमृतमस्तु मंत्र कब बोला जाता है?
PAURANIK.ORG
संक्षिप्त उत्तर
नैवेद्य अर्पण के समय भोग को अमृतमयी बनाने के लिए 'अमृतमस्तु' बोलकर जल छिड़का जाता है।
नैवेद्य (भोग) विधि के दौरान, जब गायत्री मंत्र और अपोज्योति मंत्र पढ़कर जल छिड़का जाता है, उसके तुरंत बाद 'अमृतमस्तु' कहा जाता है।
इसका अर्थ है कि यह भोजन अमृत के समान हो जाए। यह कहकर भोग पर अंतिम बार जल छिड़का जाता है।
📖
सम्पूर्ण उत्तर पढ़ें
शास्त्रीय प्रमाण सहित विस्तृत उत्तर
पूरा उत्तर पढ़ें →
PAURANIK.ORG