अन्नदान और प्रेत का सीधा संबंध — पिंड (अन्न) से प्रेत-शरीर बनता है, श्राद्ध का अन्न प्रेत को तृप्त करता है और मुक्ति मिलती है। 'अन्न का दान न करने' का उलाहना यमदूत देते हैं — यही अन्नदान का सर्वोच्च प
गरुड़ पुराण में अन्नदान और प्रेत के बीच के संबंध का अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रत्यक्ष वर्णन है।
पिंडदान = प्रेत का अन्न — दशगात्र में जो पिंड दिए जाते हैं वे अन्न से ही बने होते हैं। यह अन्न-पिंड प्रेत का भोजन है।